मूल्यों की विशेषताएँ Properties of values

मूल्यों की विशेषताएँ Properties of values

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख मूल्य क्या है? मूल्यों की विशेषताएँ (Properties of value) में।

दोस्तों यहाँ पर आप मूल्यों की विशेषताएँ के साथ मूल्य क्या है? मूल्यों की परिभाषा मूल्य शिक्षा की विशेषताएँ भी पड़ेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख मूल्यों की विशेषताएँ:-

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मूल्यों की विशेषताएँ

मूल्य क्या है what is value 

मूल्य को अंग्रेजी भाषा में वैल्यू (value) कहा जाता है जो लैटिन भाषा से निर्मित हुआ है, जिसका अर्थ किसी की महत्ता, उपयोगिता और वाक्षनीयता से लगाया जाता है। साधारण शब्दों में कह सकते है कि मूल्य एक वह प्रतिमान है, जिससे व्यक्ति के गुणों को आँका जाता है। 

मूल्यों की परिभाषा Defination of value 

जीवन के मूल्य तत्व माने जाते हैं, शुद्ध क्रियाएँ धर्म कहलाते हैं और धर्म में शांति प्रेम और अहिंसा को सबसे प्रमुख स्थान दिया जाता है। पांच मानव मूल्य माने जाते हैं, इन्हें पंचप्राण, प्रणन, अपान, उधान,समान तथा व्यान के नाम से भी जाना जाता है।

यह सांस प्रवाह की अवस्थाएँ होती हैं, क्योंकि मूल्यों में जीवन की स्वांस प्रक्रिया निहित होती है। मूल्य उन क्रियाओं के आभाव में निर्जीव हो जाता है। भारतीय साहित्य में मूल्यों की व्याख्या निम्नांकित रूप से की गई है योग एवं प्राणायाम में इन्हीं मूल्यों को महत्व दिया गया है।

मूल्य की परिभाषा राधाकमल जी के अनुसार:- 

मूल्य समाज द्वारा अनुमोदित उन इक्षाओं और लक्ष्यों के रूप में परिभाषित किए जा सकते हैं, जिन्हें अनुबंधन, अधिगम, समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा आत्मसात किया जाता है तथा जो व्यक्तिगत मांगों तथा आकांक्षाओं के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं।

मूल्य की परिभाषा ऑगवार्न के अनुसार:-

मूल्य वे प्रतिमान होते है, जो मानव इक्षाओं की तुष्टि कर सकते हों।

मूल्यों की विशेषताएँ Properties of values

मूल्य शिक्षा की विशेषताएँ :- 

  1. मूल्यों की प्रकृति दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक मानवीय तथा परिस्थितिक हो सकती है।
  2. मूल्य जैविक, नैतिक सामाजिक तथा आध्यात्मिक प्रकार के होते हैं।
  3. भारतीय साहित्य में पांच मूल्य सत्य धर्म प्रेम शांति अहिंसा का उल्लेख दिखाई देता है।
  4. मूल्य के तीन तत्व होते हैं, जो क्रिया भाव और ज्ञान होते हैं।
  5. समाज द्वारा अनुमोदित इच्छाएँ और लक्ष्य को मूल्य ही माना जाता है।
  6. मूल्य सैद्धांतिक भी होते हैं और व्यवहारिक होते हैं, सामाजिक मानक मानदंड भी मूल्य होते हैं।
  7. मूल्यों को शिक्षा का लक्ष्य माना जाता है। मूल्य आकांक्षा इच्छा अभीप्रेरणाओ तथा आवश्यकताओं के रूप में होते हैं।
  8. मूल्यों के अंतर्गत अनुबंधन, अधिगम तथा सामाजीकरण की आर्थिक प्रक्रिया होती है, और मूल्यों से ही मानवीय इच्छाओं की संतुष्टि होती है।
  9. मूल्यों में भावात्मक निर्णय तथा समानीकरण भावनाएं होती हैं, मूल्यों का संबंध आंतरिक इच्छाओं से रहता है।
  10. मूल्यों के निर्धारक, धर्म, संस्कृति तथा समाज को माना जाता है, क्योंकि मूल्यों का विकास सामाजिक परंपराओं क्रियाओं धार्मिक क्रियाओ आदि प्रक्रिया के फलस्वरूप ही होता है।
  11. मूल्यों का शिक्षण नहीं होता है, अपितु इसको हृदय में बैठाया जाता है, क्योंकि यह भाव पक्ष प्रधान होते हैं।
  12. छात्र मूल्यों को सीखता नहीं है, अपितु उनको आत्मसात और उनका अनुसरण करता है।
  13. मूल्यों से सामाजिक तथा धार्मिक स्वभाव को प्रोन्नत किया जा सकता है, मूल सामाजिक जीवन के शुद्ध आचरण माने जाते हैं और शुद्ध आचरण में नैतिक एवं सामाजिक शुद्धता होती है।

दोस्तों आपने यहाँ पर मूल्यो की विशेषताएँ (Properties of values) पढ़ी। आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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