अनिषेक जनन क्या है इसका महत्व What is parthenogenesis, its importance



अनिषेक जनन क्या है इसका महत्व What is Parthenogenesis its importance

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है आज के इस लेख अनिषेक जनन क्या है, इसका महत्व क्या है (what is parthenogenesis its importance) में।

दोस्तों इस लेख में आप अनिषेक जनन क्या है इसकी परिभाषा प्रकार तथा उदाहरण जान सकेंगे। तो आइये दोस्तों शुरू करते है, आज का यह लेख अनिषेक जनन क्या है इसका महत्व क्या है:- 

अनिषेक जनन क्या है इसका महत्व

अनिषेक जनन क्या है what is parthenogenesis

संसार में जीव जंतुओं की कई प्रजातियाँ हैं, जिनमें सभी लगभग सभी जीव जंतुओं में एक अभिन्न गुण पाया जाता है और वह गुण होता है "प्रजनन का"  (Reproduction) प्रजनन के द्वारा ही जीव जंतु अपने जैसे जीवो को जन्म देते है।

प्रजनन की क्रिया के द्वारा ही एक जीव अन्य जीवो को जन्म देने की क्षमता रखता है। अधिकतर जीव जंतु लैंगिक प्रजनन के द्वारा जीवो की उत्पत्ति करते हैं।

लैंगिक प्रजनन में जीव जंतुओं में जनन अंग (Reproductive organs) पाए जाते हैं। इन जनन अंगों के द्वारा युग्मकों का निर्माण होता है। नर और मादा दोनों युग्मक आपस में मिलकर निषेचन (Fertilization) की क्रिया करते हैं।

जिसके पश्चात भ्रूण (Embryo) बनता है और भ्रूण से नए जीवो का निर्माण भी होता है, किंतु बहुत से ऐसे प्राणी संसार में उपस्थित हैं, जिनमें जीवो को उत्पन्न करने की लैंगिक प्रक्रिया लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction) नहीं पाया जाता।

किंतु इन जंतुओं में युग्मकों का निर्माण तो होता है। लेकिन निषेचन की क्रिया नहीं होती और इस निषेचन की क्रिया की अनुपस्थिति में अंडे में परिवर्धन होता है, तथा जीव का विकास होता है, इस प्रकार के प्रजनन को ही अनिषेक जनन कहा जाता है।

साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि अनिषेक जनन वह प्रक्रिया है, जिसमें नये जीवो की उत्पत्ति लैंगिक प्रजनन प्रक्रिया के बिना ही होती है, वह प्रजनन अनिषेक जनन (Parthenogenesis) कहलाता है।

अनिषेक जनन की परिभाषा Defination of parthenogenesis

अनिषेक जनन प्रजनन कि वह एक विशिष्ट प्रकार की प्रक्रिया होती है। जिसमें अंडे का परिवर्धन बिना किसी निषेचन के ही हो जाता है।

बेयटी के अनुसार (1967) - जब मादा युग्मक अंडा परिपक्व हो जाता है, किंतु वह नरयुग्मक से बिना संपर्क में आए और बिना किसी अनुवांशिक पदार्थ को ग्रहण किए ही भ्रूण में परिवर्तित होने लगता है, उस प्रक्रिया को अनिषेक जनन कहते हैं।

अर्थात साधारण शब्दों में कहा जा सकता है, कि नर युग्मक शुक्राणु के बिना संयोजन से अंडाणु में भ्रूणीय परिवर्धन की प्रक्रिया आने को अनिषेकजनन कहते है।

अनिषेक जनन के प्रकार Type of parthenogenesis

अनिषेक जनन दो प्रकार का होता है, प्राकृतिक अनिषेकजनन, तथा कृतिम अनिषेकजनन जिन्हे हम निम्न प्रकार से समझते है:-

प्राकृतिक अनिषेकजनन, Natural Parthenogenesis

प्राकृतिक अनिषेकजनन स्वतः होने वाली एक प्रजनन की प्रक्रिया है, जो मुख्यतः निम्न स्तर के जीव जंतुओं में पाई जाती है।

जैसे की रोटीफोरा, प्लेटीहेलमाइंथेस निमेटोड, एनिलिड़ा, मोलस्का, आदि. किंतु कुछ उच्च स्तर के जंतु भी होते हैं, जिनमें प्राकृतिक अनिषेकजनन की प्रक्रिया देखी जाती है. जैसे कि मछली उभयचर और पक्षी।

इन सभी जंतुओं में अनिषेकजनन की प्रक्रिया सतत रूप से जीवन चक्र में होती रहती है। प्राकृतिक अनिषेकजनन के द्वारा कभी नर कभी मादा तो कभी नर और मादा दोनों विकसित हो जाते हैं।

  • अगुणित अनिषेक जनन दो प्रकार का होता है।

चक्रीय अगुणित अनिषेक जनन - इस अनिषेकजनन में पार्थिनोजिनेसिस एवं लैंगिक प्रजनीय पीढ़ी एक के बाद एक उसी क्रम में उत्पन्न होती रहती है।

पूर्ण अगुणित अनिषेक जनन - इस प्रकार के अनिषेकजनन में केवल मादाएँ ही पाई जाती हैं और अपनी जातियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी करती रहती हैं।

किंतु बीजमान (Beejmaan) ने बताया कि अनिषेक जनन में उत्पन्न होने वाले अंडों में पूर्ण अर्धसूत्री विभाजन की प्रक्रिया होती ही नहीं है।

और अगुणित अंडो में भी वयस्कों का निर्माण अनिषेक जनन की प्रक्रिया के द्वारा संभव होता है। इस प्रकार से अनिषेकजनन को दो भागों में बांट दिया गया है.

  • अगुणित अनिषेक जनन Haploid Parthenogenesis

अगुणित अनिषेक जनन में अनिषेचित अंडों से नर जीवो की उत्पत्ति होती है। जबकि निषेचित अंडों से मादा जीवो की उत्पत्ति होती है।

इस प्रकार से कह सकते हैं, कि जो नर पैदा होते हैं वह अगुणित (Haploid) होते हैं और जो मादा पैदा होती हैं वह द्विगुणित (Diploid) होती हैं।

  • द्विगुणित अनिषेक जनन Diploid Parthenogenesis

इस अनिषेक जनन में जो मादा विकसित होती है वह द्विगुणित (Diploid) होती हैं। जो पहले अगुणित होती हैं, किंतु बाद में किसी भी अन्य कारण के द्वारा वह द्विगुणित में परिवर्तित हो जाती हैं। 

  • उदाहरण Example 

अनिषेक जनन का उदाहरण हम मधुमक्खियों में अनिषेक जनन के उदाहरण से समझते हैं, क्योंकि जो मधुमक्खियाँ उत्पन्न होती हैं, उनमें नर मधुमक्खियाँ तो अगुणित होती हैं

और मादा मधुमक्खियाँ द्विगुणित होती हैं। अर्थात इस में होने वाले अनिषेक जनन में युग्मकों का निर्माण अर्धसूत्री विभाजन की सामान्य प्रक्रिया के द्वारा होता है।

जैसे की रानी मधुमक्खी एक वह मादा होती है जो नर के द्वारा निषेचित (Fertilized) होती है और शुक्राणुओं को संग्रहित भी कर लेती है।

तथा मधुमक्खी के छत्ते या कॉलोनी में जिस प्रकार के अंडों की आवश्यकता होती है उस प्रकार के अंडे जैसे कि निषेचित अंडे और अनिषेचित अंडे रानी मधुमक्खी छत्ते में दे देती है।

अब निषेचित अंडा 32 क्रोमोसोम (32 Chromosome) अर्थात 2X होता है। जबकि अनिषेचित अंडा 16 क्रोमोसोम (16 Chromosome) युक्त अर्थात X होता है।

किंतु यहाँ जब शुक्राणुओं का निर्माण होता है, तो अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) नहीं होता अर्थात नर की दैहिक और युग्मक कोशिका में समान संख्या में क्रोमोसोम उपस्थित होते हैं।

कृत्रिम अनिषेकजनन Artificial Parthenogenesis

कुछ विशिष्ट उपाय, उपचार तथा मानव श्रम के द्वारा किया गया अनिषेकजनन कृत्रिम अनिषेकजनन (Artificial Parthenogenesis) कहा जाता है।

इस प्रक्रिया में किसी भी विशिष्ट प्रकार के उपचारों के द्वारा परिपक्व अंडाणु को बिना किसी नर युग्मक के संपर्क में लाए ही परिवर्धन की प्रक्रिया में पहुंचा देना कृत्रिम अनिषेकजनन कहलाता है।

तारा मछली, समुद्री अर्चन मेंढक, मछली, मुर्गा, खरगोश आदि प्राणियों में विभिन्न प्रकार की कृत्रिम विधियों और उपायों के द्वारा अंडे में परिवर्धन को उत्तेजित या उद्दीप्त किया जाता है।

कृत्रिम अनिषेकजनन सफलतापूर्वक संपन्न नहीं हो पाता है, कभी-कभी इससे भ्रूण व्यस्क में परिवर्तित हो जाते हैं तो कभी-कभी भ्रूण विकसित ही नहीं हो पाते और कभी-कभी यह प्रारंभिक अवस्था में ही मृत हो जाते हैं।

कृत्रिम अनिषेकजनन तीन प्रकार की प्रक्रियाओं के द्वारा होता है जो निम्न प्रकार से है:- 

  • रासायनिक उपचार के द्वारा By chemical treatment

कुछ रसायनों के द्वारा परिपक्व अंडे को परिवर्धन के लिए उत्तेजित (Excited) करना रासायनिक उपचार के अंतर्गत आता है।

रासायनिक उपचार में निम्न प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जाता है, अल्प एवं अति सांन्द्र लवण घोल, कुछ कमजोर अम्ल जैसे ब्यूटीरिक लैक्टिक और ओलिक अम्ल, क्षार 0.01/NH3,

कुछ अकार्बनिक लवण जैसे लिथियम सोडियम कैलशियम मैग्निशियम के क्लोराइड, कुछ वसा के घोल जैसे अल्कोहल बेंजीन एसीटोन आदि।

  • भौतिक कारकों के द्वारा उपचार Treatment by physical factors

भौतिक कारकों में तापमान का उपयोग किया जाता है, तापमान में अचानक परिवर्तन करके परिपक्व अंडाणु को परिवर्धन के लिए उद्दीप्त किया जाता है.

जैसे कि अगर परिपक्व अंडे को 30 डिग्री सेंटीग्रेड से 0 डिग्री सेंटीग्रेड पर रख दिया जाए तो अनिषेकजनन संपन्न हो सकता है।

इसके अलावा सुई के चुभने के द्वारा ,और विद्युत का झटका लगा कर भी अंडे को उद्दीप्त (incited) किया जा सकता है।

  • विकिरण के द्वारा उपचार Treatment by radiation

जो शुक्राणु निष्क्रिय होता है तथा पराबैंगनी किरणों से उपचारित होते है उस शुक्राणु के द्वारा भी अंडाणु में अनिषेकजनन उद्दीप्त किया जा सकता है।



अनिषेकजनन का महत्व Importence of parthenogenesis

  1. लिंग निर्धारण की विधि (Method of sex determination) - अनिषेक जनन के द्वारा ही लैंगिक निर्धारण करना आसान हो जाता है और इसके लिए किसी भी लिंग निर्धारण विधि का उपयोग भी नहीं करना पड़ता। जैसे कि एफीड और मधुमक्खी दोनों में ही नर की उत्पत्ति अनिषेचित अंडे से होती है तो मादा की उत्पत्ति निषेचित अंडे से होती है।
  2. प्रजनन विधि (Reproduction Method) - अनिषेक जनन एक उपयोगी और महत्वपूर्ण प्रजनन विधि भी है, जिसके द्वारा प्राणियों को पीड़ित दर पीढ़ी आगे जीवित रखने के लिए अनिषेक जनन की प्रक्रिया द्वारा उन्हें उत्पन्न किया जा सकता है।
  3. ऊर्जा का संरक्षण (Energy conservation)- अनिषेक जनन का महत्व है, कि इससे ऊर्जा का संरक्षण होता है। अर्थात जो ऊर्जा का निवेश शुक्राणु निर्माण में निषेचन में तथा अन्य प्रक्रियाओं में किया जाता है। उस ऊर्जा का संरक्षण अनिषेक जनन प्रजनन के द्वारा किया जा सकता है।
  4. बहुगुणिता का विकास (Development of multiplicity) - अनिषेक जनन एक ऐसी प्रजनन प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीवों में बहुगुणिता उत्पन्न हो जाती हैं। बहुगुणिता के द्वारा जीवो के कुछ लक्षणों को विकसित करना भी आसान हो जाता है।
  5. अनुवांशिक संयोग (Genetic coincidence) - अनिषेक जनन के द्वारा ही जीवो में जो लक्षण पाए जाते हैं, उन लक्षणों को बिना परिवर्तित किए पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाना बहुत ही आसान होता है। और ऐसा अनुवांशिक सहयोग से प्राप्त किए गए लक्षणों को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाना मुश्किल होता है।

दोस्तों आपने यहाँ अनिषेक जनन क्या है इसका महत्व क्या है (what is parthenogenesis its importance) के बारे में पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

  • FAQ for Parthenogenesis





अनिषेक जनन कितने प्रकार के होते हैं?





अनिषेक जनन दो प्रकार का प्राकृतिक और कृत्रिम अनिषेकजनन होता है।









अनिषेक जनन किस में होता है?





अनिषेक जनन मधुमक्खी और अन्य कीटों में होता है।







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  5. निषेचन किसे कहते है इसका महत्व



2/Post a Comment/Comments

  1. बेनामीJuly 21, 2022 at 3:35 AM

    Katrin anisechak janan samjao 50sabdo me bsc 1st year

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  2. Anishek janan ka mahatv batao

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