पाउली का अपवर्जन नियम Pauli's Exclusion principle
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है आज के हमारे इस लेख पाउली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion principle) में।
दोस्तों इस लेख द्वारा आज आप पाउली का अपवर्जन सिद्धात क्या है? पाउली का अपवर्जन नियम के महत्व उदाहरण सहित जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख पाउली का अपवर्जन नियम:-
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पाउली का अपवर्जन सिद्धात Pauli's Exclusion principle
पाउली जो ऑष्ट्रीया के एक महान वैज्ञानिक थे, उन्होंने 1926 में परमाणु की विभिन्न ऊर्जा स्तरों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने और उनकी व्यवस्था का निर्धारण करने के लिए एक सिद्धांत एक नियम प्रतिपादित किया जिसे पावली का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's Exclusion principle) के नाम से जाना जाता है।
पाउली का अपवर्जन नियम के अनुसार किसी भी परमाणु में कोई भी दो इलेक्ट्रॉनों की चारो क्वांटम संख्याऐं (मुख्य क्वांटम संख्या, द्विगवंशी क्वांटम संख्या, चुंबकीय क्वांटम संख्या तथा चक्रण क्वांटम संख्या) के मान एक समान नहीं हो सकते।
साधारण रूप से हम समझ सकते हैं, कि एक कक्षक में हमेशा दो इलेक्ट्रॉन रहते हैं और इन इलेक्ट्रॉनों का चक्कर विपरीत दिशा में होता है, जिससे हम समझ सकते हैं, कि प्रत्येक इलेक्ट्रॉन दूसरे इलेक्ट्रॉन से कुल ऊर्जा में कुछ ना कुछ तो भिन्नता अवश्य रखता है।
यदि दो इलेक्ट्रॉन ऐसे हैं, जिनके (n, l, m) अर्थात मुख्य क्वांटम संख्या, द्विगवंशी क्वांटम संख्या, चुंबकीय क्वांटम संख्याओं के मान समान हैं तो उनके चक्रण क्वांटम संख्याओं के मान हमेशा विपरीत ही होंगे।
किसी एक कक्षक में दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चक्रण क्वांटम संख्याओं के मान क्रमश: +1/2 क्लॉकवाइज -1/2 होते है।
उदाहरण के लिए 1s2 में दोनों इलेक्ट्रॉनो के लिए चारों क्वांटम संख्या का मान निम्न होगा।
क्वांटम संख्या n l m s
1. इलेक्ट्रान 1 0 0 +1/2
2. इलेक्ट्रान 1 0 0 -1/2
उदाहरण :- इस नियम के आधार पर हम परमाणु के किसी भी कोश में उपस्थित किसी भी इलेक्ट्रॉन की चारो क्वांटम संख्याओं का मान ज्ञात कर सकते हैं, जैसे कि M कोश में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या 18 होती है, M कोश को हम n=3 भी लिख सकते हैं,
जो किसी परमाणु की तीसरी कक्षा को प्रदर्शित करता है, जिसके लिए द्विगवंशी क्वांटम संख्या l के लिए तीन मान 0.1.2 होते हैं जबकि m के लिए कुल 9 मान होते हैं, इसके हिसाब से कुल 9 कक्षक उपस्थित होते हैं, जिनमें प्रत्येक कक्षक में +1/2 और -1/2 चक्रण वाले 1-1 इलेक्ट्रॉन युग में पाए जाते हैं. इससे हमें ज्ञात होता है, कि इन 9 कक्षकों में 18 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए m कोश में अधिकतम 18 इलेक्ट्रॉन ही पाए जाते हैं।
पाउली का अपवर्जन नियम के महत्व Importance of Pauli's Exclusion Principle
- पाउली का अपवर्जन नियम का सबसे बड़ा महत्व इलेक्ट्रॉन विन्यास के निर्धारण में होता है। इस नियम की सहायता से यह भी ज्ञात हो जाता है, कि किसी भी एक कक्षक में अधिक से अधिक दो ही इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं जबकि इनका चक्कर हमेशा विपरीत दिशा में ही रहता है।
- इस नियम की सहायता के द्वारा किसी भी मुख्य कोष में इलेक्ट्रॉन की अधिकतम संख्या आसानी से ज्ञात की जा सकती है, जिसके लिए 2n2 का उपयोग किया जाता है।
- इस नियम के द्वारा यह भी निर्धारित किया जा सकता है, कि किसी भी इलेक्ट्रॉन की किसी भी कक्षक में चारो क्वांटम संख्याओं के मान एक समान नहीं हो सकती है।
दोस्तों यहाँ पर आपने पाउली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion principle) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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