आफबाऊ सिद्धांत का उल्लेख कीजिए Mention the Aufbau principle
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख आफबाऊ सिद्धांत का उल्लेख कीजिए (Mention the Aufbau principle) में।
दोस्तों इस लेख में आज आप आफबाऊ सिद्धांत क्या है? आफबाऊ सिद्धांत के उदाहरण, सीमाएँ n+l नियम आदि के बारे में जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख आफबाऊ सिद्धांत का उल्लेख कीजिए :-
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आफबाऊ सिद्धांत का क्या है What is Aufbau principle
आफबाऊ शब्द का अर्थ होता है "निर्माण करना" क्योंकि आफबाऊ एक जर्मन भाषा का शब्द है, इसलिए इसके अर्थ अनुसार इसका प्रयोग कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों को भरने के लिए किया गया है, अर्थात आफबाऊ शब्द का आशय कक्षाओं में सही प्रकार से इलेक्ट्रॉनों को भरकर निर्माण करने से हैं।
आफबाऊ सिद्धांत का प्रयोग परमाणु और तत्वों में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने के लिए किया जाता है। इस सिद्धांत के द्वारा न्यूनतम ऊर्जा के तंत्र सबसे अधिक स्थाई होते हैं. ऐसा माना जाता है और इसीलिए सबसे पहले इलेक्ट्रॉन कम ऊर्जा वाले कक्षक में प्रवेश करता है। आफबाऊ सिद्धांत के अनुसार किसी भी परमाणु के विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों को
भरने का क्रम उनकी ऊर्जा के बढ़ते हुए क्रम में होता है जैसे कि सबसे पहले कम ऊर्जा स्तर के कक्षा में इलेक्ट्रॉन प्रवेश करेगा। इसके बाद उससे अधिक ऊर्जा स्तर के कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों का भराव होता है, जिसे हम निम्न प्रकार से प्रदर्शित करते हैं 1s,2s,2p,3s,3p,4s,3d,4p,5s,4d,5p,6s,4f,6p,7s, 5f, 6d, 7p।
n+l नियम उदाहरण सहित n+l rule with example
- परमाणु के किसी भी कक्षक के ऊर्जा स्तर का पता लगाना n+l के नियम के आधार पर होता है और इसी नियम के आधार पर किसी परमाणु के कक्षाओं के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों को भरा जाता है।
- n+l के नियम के आधार पर जिस कक्षा के लिए n+l का मान निकालना है उसकी मुख्य क्वांटम संख्या जिसे हम n से प्रदर्शित करते हैं, जबकि दूसरी द्विगवंशी क्वांटम संख्या जिससे l से प्रदर्शित किया जाता है दोनों का मान कम होता है, उस कक्षक में इलेक्ट्रॉन पहले भरा जाता है
- यदि दो या दो से अधिक कक्षाओं का मान एक समान आता है तो उस ऊर्जा स्तर के कक्षक में इलेक्ट्रॉन पहले भरा जाता है, जिसके लिए मुख्य क्वांटम संख्या का मान कम होता है।
उदाहरण :- 2p और 3p कक्षक में n+l के लिए मान निम्न प्रकार से निर्धारित कर सकते हैं:-
यहाँ 2p में 2 मुख्य क्वांटम संख्या को प्रदर्शित करता है इसलिए यहां पर n =2 होगा जबकि p के लिए l का मान 1 होता है इस प्रकार 2p के लिए n+l का मान 3 होगा जबकि 3p के लिए n+l का मान 4 होगा इस प्रकार से हम कह सकते हैं,
कि 2p कक्षक का ऊर्जा स्तर अर्थात इसके लिए n+l का मान 3 है जबकि 3p के लिए n+l का मान 4 है इसलिए 2p वाले कक्षक में इलेक्ट्रॉन पहले भरा जाएगा, जबकि 3p कक्षक में इलेक्ट्रान बाद में भरा जायेगा।
उदाहरण :- 3p और 4s कक्षक के लिए निम्न प्रकार से n+l का मान निर्धारित कर सकते है:-
यहाँ 3p में 3 मुख्य क्वांटम संख्या को प्रदर्शित करता है इसीलिए यहां पर n=3 होगा जबकि p के लिए l का मान 1 होता है इस प्रकार 3p कक्षक के लिए n+l का मान 4 हुआ जबकि 4s कक्षक
में मुख्य क्वांटम संख्या का मान n=4 होगा जबकि s के लिए p का मान 0 होता है इस प्रकार से 4s कक्षक के लिए n+l का मान 4 होगा।
अब यहाँ पर दोनों कक्षकों के लिए n+l का मान 4 हो रहा है, इसलिए इलेक्ट्रान 3p कक्षक में पहले प्रवेश करेगा कियोकि 3p कक्षक के लिए मुख्य क्वांटम संख्या का मान कम है जबकि 4s कक्षक के लिए मुख्य क्वांटम संख्या का मान अधिक है।
अधिकांश परमाणुओं के कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों को भरने के लिए आफबाऊ सिद्धांत n+l के नियम का अनुसरण किया जाता है, किंतु कुछ ऐसे अपवाद भी हैं जैसे कि Cr (Z=24), Cu (Z=29), Mo (Z=42) Pd (Z=47) Ag (Z=47) Au (Z=79) आदि इनमें इलेक्ट्रॉनों की भरने का सही तरीका कक्षाओं के आपेक्षिक स्थापित के अनुसार होता है।
आफबाऊ सिद्धांत की सीमाएँ Limitations of Aufbau Theory
यह परमाणु के आयनीकरण अर्थात परमाणु से आयन बन जाने के पश्चात उसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने में प्रयुक्त नहीं होता है, क्योंकि जब परमाणु आयन बन जाता है, तो यह नियम यह सिद्ध नहीं कर पाता है, कि परमाणु के आयन बनने पर इलेक्ट्रॉन किस कक्षक से बाहर जायेगा।
उदाहरण के लिए fe (26) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2,2s2,2p6,3s2,3p6,4s2,3d6 आता है, किन्तु आयरन के आयन बनने पर fe2+ का चुंबकीय अध्ययन के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2,2s2,2p6,3s2,3p6,3d6 होता है, ना कि 1s2,2s2,2p6,3s2,3p6,4s2,3d6 इस प्रकार fe के fe2+ बनने पर इलेक्ट्रान 4s कक्षक में से बाहर जाते है ना कि 3d से जबकि आफबाऊ सिद्धांत और n+l के नियम के आधार पर 4s कक्षक की ऊर्जा 3d कक्षक से कम है।
छठवें आवर्त में 4f तथा 5d कक्षक ऊर्जा में अधिक समानता देखने को मिलती है, आफबाऊ सिद्धांत और n+l के नियम के आधार पर लैंथेनम (z=57) का अंतिम इलेक्ट्रान 4f में जाना चाहिए, किन्तु वह 5d में जाता है।
Nb (41) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 5s2,4d3 न होकर 5s1,4d4 होता है इसीप्रकार Pd (46) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास.... 5s2, 4d8 न होकर 4s0,4d10 पाया जाता है।
दोस्तों यहाँ पर आपने आफबाऊ सिद्धांत का उल्लेख कीजिए (Mention the Aufbau principle) तथा अन्य तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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