गर्भाधान का सही समय विधि गर्भाधान संस्कार Right time to conceive

गर्भाधान का सही समय विधि गर्भाधान संस्कार Right time to conceive

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख गर्भाधान का सही समय विधि गर्भाधान संस्कार (Right time to conceive) में।

दोस्तों यहाँ पर आप गर्भाधान क्या है? गर्भाधान संस्कार क्या है? गर्भाधान कैसे करे? आदि कई महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख गर्भाधान का सही समय विधि गर्भाधान संस्कार:-

गर्भाधान का सही समय विधि गर्भाधान संस्कार Right time to conceive
Credit to onlymyhealth


गर्भाधान क्या है in hindi

गर्भ को धारण करना ही गर्भाधान कहा जाता है। साधारण शब्दों में कह सकते है, कि जब मादा और नर आपस में सम्भोग करते है, जिससे नर का नर युग्मक (शुक्राणु) मादा की अंडवाहिनी (Oviduct) में पहुँचता है और मादा के युग्मक (अंडाणु) से संयोग करता है जिसे निषेचन कहते है।

अब यह निषेचित अंड मादा के गर्भाशय (Uterus) में स्थापित हो जाता है जिसे गर्भ और इस अवस्था को गर्भधारण और मादा को गर्भवती कहा जाता है। हिन्दू धर्म में 16 संस्कार होते है, जिनमें सबसे पहला संस्कार गर्भाधान होता है, कियोकि गर्भाधान के कुछ निश्चित समय बाद संतान की उत्पत्ति होती है,

जो उस वंश परिवार और प्रजाति के अस्तित्व को बनाये रखती है। इसलिए गर्भाधान से पहले मन और तन की पवित्रता अति आवश्यक होती है, जिससे एक उत्तम संतान प्राप्त करने के आसार होते है।


गर्भाधान संस्कार क्या है What is conception

गर्भाधान संस्कार हिन्दू धर्म के 16 संस्कारो में प्रथम संस्कार माना जाता है, जिसमें गर्भधारण के नियम आदि के बारे बताया जाता है। पुराने समय में कन्याएँ तपसी, शक्तिशाली और नियम संयम वाले पुरुषों से ब्याह करने की इच्छा अधिक रखती थी,

कियोकि ऐसे पुरुष अपने मन और तन को पवित्र रखते थे, जिससे उनकी संतान उच्च गुणों से युक्त होती थी। इसलिए गर्भाधान संस्कार में स्त्री और पुरुष को समागम करने से पहले तन मन को शुद्ध करना चाहिए और गर्भधारण का समय तिथि आदि को भी जानना चाहिए।

जैसे की प्रतिपदा, अमावस, पूनम, अष्टमी और चतुदर्शी जैसी तिथि को गर्भधारण का कार्य नहीं करना चाहिए। गर्भधारण का कार्य शाम को और दिन में भी नहीं किया जाना चाहिए वरना संतान बुरे गुणों से युक्त अल्पायु होती है। गर्भधारण करने का सही समय रात्रि चार बजे के लगभग होना चाहिए जिससे संतान सूर्य के समान तेज अच्छे गुणों से युक्त और दीर्धायु होती है। 


गर्भाधान कैसे करे How to conceive

गर्भाधान एक जटिल प्रिक्रिया है, जिसमें शुक्राणुओं (Sperms) के द्वारा काफी मेहनत होती है। गर्भधारण करने के लिए कई सबसे पहले पुरुष और महिला दोनों को स्वास्थ्य होना जरूरी है, कियोकि उनके स्वास्थ्य होने पर उनके शरीर में बने युग्मक भी स्वास्थ्य होते है।

गर्भधारण करने के लिए आपको सप्ताह में दो या तीन दिन समागम करना पड़ सकता है, जबकि पीरियडस् (Periods) के पहले के लगभग 6 दिन और बाद के लगभग 4 दिन भी गर्भाधान के लिए उत्तम होते है। नर और मादा के समागम होने पर मादा के शरीर में नर का वीर्य रह जाता है, जिसमें लाखों शुक्राणु होते है,

जो फेलोपियन ट्यूब (Fallopian tubes) की और पहुँचते है, किन्तु वहाँ तक जाने में काफी शुक्राणुओं की मृत्यु हो जाती है और कुछ ही शुक्राणु फेलोपियन ट्यूब में अंडाणु तक पहुँच पाते है,

जिसमें से एक शुक्राणु ही उस अंडाणु को फ़र्टिलाइज़ (Fertilised) करता है, किन्तु मादा को कुछ ध्यान देने योग्य बातें भी याद रखनी होंगी जैसी सम्भोग के तुरंत बाद पेशाब ना जाएँ, सम्भोग के बाद आराम करें आदि।

 

गर्भाधान का सही समय Right time to conceive

यह बात सत्य है, कि शादी के बाद स्वयं नवविवाहिता जोड़ा उनके माता पिता जल्द संतान की इक्छा प्रकट करने लगते है, वे बच्चों की किलकारी उनकी बाल लीलाओं से आनंदित और प्रसन्न होना चाहते है इसलिए नविवाहिता जल्द संतान उत्पन्न करते है,

किन्तु कुछ विवाहिता जोड़े ऐसा नहीं करते है वे क्वालिटी टाइम बिताने के बाद फैमिली प्लानिंग करते है, लेकिन घर में नये मेहमान को लाने और गर्भधारण की सही जानकारी भी होना चाहिए

कियोकि इस जानकारी के आभाव में बहुत से लोग बच्चों के प्रेम और बाल लीलाओं से वंचित रह जाते है, इसलिए गर्भाधान का सही समय और गर्भअवस्था क्या होती है, इसके बारे में जान लेना चाहिए।

गर्भावस्था वह स्थिति होती है, जब नर युग्मक शुक्राणु मादा युग्मक अंडाणु को निषेचित करता है और वह निषेचित अंडाणु गर्भाशय में स्थापित होता है। इसलिए गर्भधारण के लिए सबसे पहले नर और मादा का समागम बहुत जरूरी होता है और वह कब होना चाहिए ये कुछ बातों पर निर्भर करता है जो निम्न है:-

सभोंग करने अर्थात मादा और पुरुष के समागम करने के लगभग 5 दिन के अंदर गर्भधारण हो सकता है, कियोकि शुक्राणु मादा के फेलोपियान ट्यूब में 5 दिन तक ही रहने की क्षमता रखते है।

गर्भधारण करने का सबसे सरल और सही समय समय सप्ताह में एक दिन छोड़कर सम्भोग करना या सप्ताह में दो दिन सम्भोग करना उत्तम माना जाता है।

महिला की पीरियडस् की अवधि समाप्त होने के बाद लगभग 5 दिन तक और पीरियडस् की अवधि शुरू होने से लगभग 6 दिन पहले का समय गर्भाधान का सही समय माना जाता है।

महिला के शरीर में एक महीने में एक ही अंडाणु अंडाशय से बनता है और यह अंडाशय से निकलने के पश्चात् 12 से 24 घंटे ही शरीर में रहता है, इसलिए इस 12 से 24 घंटे के अंदर शुक्राणु द्वारा इसको निषेचित किया जाना होता है वरना यह अंडाणु निष्क्रिय हो जाता है, जबकि शुक्राणु मादा के शरीर में 5 दिन तक जीवित रहते है, इसलिए गर्भधारण के लिए सम्भोग दो - तीन दिन में एक बार या पीरियडस् के 6 दिन पहले एक दिन छोड़कर और पीरियडस के बाद 5 दिन तक एक दिन छोड़कर का समय गर्भधारण का सही समय होता है।


गर्भधारण न होने के कारण Causes of non-pregnancy

सबका सपना होता है, कि वह भी अपने बच्चों के माता-पिता बने, वह भी उनकी किलकारियों से आनंदित हों, किन्तु बहुत से लोगों को इसके लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ लोगों को यह पल नशीब ही नहीं होता है। यहाँ पर कुछ ऐसे गर्भधारण न होने के कारण बताये गए है, जिनसे काफी स्त्री और पुरुष परेशान है:-

  1. मोटापा गर्भधारण न होने का कारण है, कियोकि मोटापे से फ़र्टिलिटी और मासिक धर्म पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
  2. स्वास्थ्य शरीर के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है, कियोकि पर्याप्त नींद ना लेने से व्यक्ति में तनाव चिड़चिड़ापन और शुक्राणुओं की कमी देखी गयी है।
  3. वर्तमान में फैशन और शौंक का दौर चल रहा है, और महिलाएँ इसमें सबसे आगे है, वे अपनी बॉडी को आकर्षक बनाने के लिए टाइट अंदरगारमेंट पहनती है, जिसका दुष्परिणाम उनकी जनन क्षमता उनके जनन अंगों पर पड़ता है।
  4. तनाव टेंशन और डिप्रेशन के साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी गर्भधारण न होने के कारण है, कियोकि इनसे मासिक धर्म प्रभावित होता है और पुरुषों में स्पर्म काउंट कम हों जाता है।
  5. वर्तमान में विभिन्न प्रकार के फास्ट फूड भी गर्भधारण को रोकते है, प्रदूषित भोजन आदि के सेवन से गर्भधारण में रूकावट आती है।
  6. अधिक सम्भोग करना या फिर कम करना भी गर्भधारण को प्रभावित करता है, कियोकि इससे गर्भधारण के रास्ते बंद होते है।
  7. इसके आलावा कई घातक बीमारियाँ पेट के कई विकार अनियमित गतिविधियाँ आदि भी गर्भधारण में अव्यवस्था उतपन्न करते है।

दोस्तों यहाँ पर आपने गर्भाधान का सही समय विधि गर्भाधान संस्कार (Right time to conceive) के साथ अन्य तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

  • इसे भी पढ़े:-
  1. शुक्राणुजनन क्या है प्रिक्रिया what is spermetoginesis
  2. अनिषेकजनन क्या है इसका महत्व What is parthenoginesis
  3. परिवार नियोजन क्या है परिवार नियोजन के उपाय what is family planning

0/Post a Comment/Comments

в