राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम National Malaria Control Program
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम (National Malaria Control Program) में दोस्तों इस लेख
के माध्यम से आज आप मलेरिया का राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम क्या है के बारे में जानेंगे, तो आइए दोस्तों करते हैं, आज का यह लेख शुरू राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम:-
मलेरिया क्या है What is Malaria
मलेरिया एक प्रोटोजोआ (Protozoa) जनित आम रोग है, जो विश्व के लगभग सभी क्षेत्रों में पाया जाता है तथा इसके प्रकोप के कारण हजारों और लाखों लोगों की मृत्यु हर साल हो जाती है।
मलेरिया रोग का कारण प्रोटोजोआ प्लाज्मोडियम होता है तथा इसके कारण चार प्रकार के मलेरिया रोग फैलते है, जिनमें से सबसे घातक मलेरिया फैलसीफेरम (Malaria falciferum) होता है,
जिसमें तेज ठंड लगने के साथ ही तेज बुखार आता है और व्यक्ति की लगातार बुखार आने के कारण मृत्यु की हो जाती है। मलेरिया के प्रोटोजोआ का वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर
(Female anopheles mosquito) होती है। इसलिए जिन क्षेत्रों पर मादा एनाफिलीज मच्छर अधिक प्रजनन करते हैं, उन क्षेत्रों में मलेरिया रोग
अधिक देखने को मिलता है और वहाँ के लोग मलेरिया से अधिक प्रभावित होते हैं, इसीलिए भारत सरकार द्वारा मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम चलाया गया।
राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम National Malaria Control Program
विश्व के विभिन्न उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के साथ ही भारतवर्ष में भी मलेरिया एक बहुत ही गंभीर समस्या के रूप में सामने आ रहा है।
स्वतंत्रता प्राप्ति करने के बाद भारत में लगभग 75 लाख से अधिक मलेरिया के मामले हर साल प्रकाश में आते थे और उनमें से लगभग 30,000 से अधिक रोगियों की मृत्यु भी हो जाती थी।
1953 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम को देशभर में चलाने की मुहिम की ताकि मलेरिया जैसे रोग से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सके। इसलिए यह कार्यक्रम 1946 में
मोरे समिति (More Committee) की सिफारिश एवं 1951 में योजना आयोग (Planning Commission) के अनुमोदन के पश्चात 1953 में चलाई गई जिसके प्रमुख रूप से निम्न उद्देश्य थे:-
- मलेरिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को कम करना
- मलेरिया के कारण मृत्यु को भारत के हर क्षेत्र में कम करना
- कृषि एवं औद्योगिक विकास की गतिविधियों पर मलेरिया के प्रभाव को प्रभावहीन बनाना।
राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम की रणनीति National Malaria Control Program Strategy
भारत सरकार के द्वारा मलेरिया नियंत्रण के लिये कई ठोस कदम उठाये गए और एक रणनीति तैयार की जिससे काफी हद तक मलेरिया पर नियंत्रण किया जा सकता था जो निम्नप्रकार से है:-
शीघ्र निदान और तुरंत उपचार Early diagnosis and prompt treatment
राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम की प्रथम रणनीति थी शीघ्र निदान और तुरंत उपचार जिसके अंतर्गत उन क्षेत्रों की पहचान की गई जहाँ पर मलेरिया अधिक फैलता था। उन क्षेत्रों में मलेरिया की
निगरानी गतिविधियों को अधिक मजबूत बनाया गया, लैबोरेट्री (Laboratory) सेवाओं का विकेंद्रीकरण किया गया ग्रामीण स्तर पर मलेरिया प्रतिरोधी
दवाओं की पहुँच को आसान और सरल बना दिया गया, पिछड़े क्षेत्रों में एवं प्रत्येक ग्राम में दवा वितरण केंद्रों पर बुखार चिकित्सा केंद्र की स्थापना की गई।
चयनात्मक रोगाणुवाहक नियंत्रण Selective pathogen control
इस व्यवस्था के अंतर्गत आंतरिक अपशिष्ट पर छिड़काव किया जाता था। मच्छरों के लारवा (Larva) को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय अपनाए जाते थे।
बायोसाइड के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता था। लोगों को मच्छर के काटने से बचने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यक्तिगत सुरक्षा के उपाय जैसे कि मच्छरदानी का प्रयोग करना पूरे कपड़े पहनना
आदि का सुझाव दिया जाता था। जैविक नियंत्रण के द्वारा भी विभिन्न प्रकार के उपाय किए जाते थे मच्छरों को मारने के लिए अपने आसपास के मच्छर प्रजनन केंद्रों को नष्ट किया जाता था. वहाँ पर दवाओं का छिड़काव किया जाता था।
क्षमता निर्माण Capacity Formation
राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत क्षमता निर्माण भी एक प्रमुख अंग था, जिसके अंतर्गत प्रशिक्षित स्टाफ को और गैर सरकारी संगठन के बहुत से कार्यकर्ताओं को मलेरिया
के विरुद्ध लड़ने के लिए विभिन्न प्रकार की जानकारी देना विभिन्न प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराना था ताकि काफी हद तक मलेरिया को रोका जा सकता है।
सूचना शिक्षा और संप्रेषण Information Education and Communication
सूचना शिक्षा और संप्रेषण मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि देश भर में मलेरिया के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना उससे बचने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर
मलेरिया से संबंधित सूचनाओं का आदान प्रदान करना उपचार की जानकारी देना समय-समय पर सरकार द्वारा रेडियो, टीवी अखबारों के माध्यम से उन सभी
का संदेश देना भी शामिल था ताकि इस कार्यक्रम को बहुत ही सफल रूप से क्रियान्वित किया जा सके तथा एक लक्ष्य जो निश्चित किया गया है उसको पाया जा सके।
दोस्तों इस लेख में आपने राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम (National Malaria Control Program) के बारे में पढ़ा आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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