शैक्षिक नियोजन के प्रकार Type of Educational Planning

शैक्षिक नियोजन के प्रकार

शैक्षिक नियोजन के प्रकार Type of Educational Planning

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख शैक्षिक नियोजन के प्रकार (Type of Educational Planning) में।

इस लेख में आप शैक्षिक नियोजन के प्रकार पड़ेंगे, तो आइये करते है शुरू यह लेख शैक्षिक नियोजन के प्रकार:-

शैक्षिक नियोजन क्या है उदेश्य आवश्यकता

शैक्षिक नियोजन के प्रकार Type of Educational Planning

  1. स्वतंत्र नियोजन - स्वतंत्र नियोजन वह नियोजन होता है, जिसमें प्रजातांत्रिक ढंग से शैक्षिक योजना को तैयार किया जाता है अर्थात पहले शैक्षिक योजना की विस्तृत भूमिका तैयार होती है फिर जनसमूह, विशेषज्ञों तथा संबंधित व्यक्तियों के सम्मुख विज्ञापन तथा विभिन्न स्रोतों के माध्यम से उस योजना को प्रस्तुत किया जाता है, इसके पश्चात इस योजना पर विभिन्न प्रकार के विचार विमर्श और सुझाव प्राप्त होते हैं, जिनके अनुसार शैक्षिक योजना में सुधार किया जाता है और सुधार करने के पश्चात स्वतंत्र रूप से क्रियान्वित किया जाता है।
  2. उद्देश्य युक्त नियोजन - सभी प्रकार की योजनाएँ किसी न किसी प्रकार के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए ही बनाई जाती हैं, किंतु कुछ ऐसी योजनाएँ होती हैं, जो विशेष प्रकार के उद्देश्य को पूरा करने के लिए बनाई जाती हैं और जब यह योजनाएँ उद्देश्य को पूरा कर लेती हैं, तब उनके उद्देश्य में परिवर्तन हो जाता है, इस प्रकार योजनाओं में भी परिवर्तन हो जाता है, उस प्रकार की योजनाओं को उद्देश्य केंद्रित योजनाएँ या नियोजन कहा जाता है, क्योंकि इन योजनाओं का स्वरूप उद्देश्यों के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
  3. दीर्घकालीन नियोजन - अवधि के आधार पर जब योजनाओं को तैयार किया जाता है, समय के अनुसार नियोजन होता है, जिसमें निश्चित समय के लिए योजनाएँ तैयार की जाती हैं, मुख्य रूप से 5 वर्ष से अधिक या 15 वर्ष तथा 30 वर्षों के लिए भी योजनाएँ तैयार होती हैं, इन सभी योजनाओं को दीर्घकालीन नियोजन कहा जाता है। दीर्घकालीन नियोजन योजनाएँ ऐसी होती हैं, जिनका लक्ष्य बहुत ही गहरा और विशाल होता है, और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अधिक समय लगता है, इसलिए यह दीर्घकालीन नियोजन कहलाता है।
  4. अल्पकालीन नियोजन - जब कम समय के लिए कई योजनाओं को तैयार किया जाता है, तब उनको अल्पकालीन नियोजन के नाम से जाना जाता है। मुख्य रूप से 1 से 5 वर्ष के लिए बनने वाली योजनाओं को अल्पकालीन नियोजन कहा जाता है। अल्पकालीन नियोजन में छोटी-छोटी शीघ्र पूर्ण होने वाली योजनाएँ रहती है, ऐसी योजनाओं का लक्ष्य कम समय में पूरा हो जाता है, तथा उद्देश्य भी निश्चित ही होता है। अल्पकालीन योजनाएँ कई प्रकार से तथा कई जगहों पर बनाई जा सकती हैं, जैसे कि विद्यालय में प्रगति के लिए छोटी-छोटी योजनाओं को बनाया जाता है। इन योजनाओं को ही अल्पकालीन नियोजन कहते हैं, जो कम समय में पूर्ण हो जाती हैं।
  5. गतिशील नियोजन - ऐसी नियोजन योजनाएँ जिनमें परिस्थितियों आवश्यकता तथा साधनों के अनुसार उन्हें शीघ्र पूरा करने के लिए अर्थात उद्देश्यों तक पहुंचने के लिए परिवर्तन किया जा सके उन योजनाओं को गतिशील नियोजन कहा जाता है। गतिशील नियोजन बहुत ही लचीले विकास और प्रगति के लिए अधिक उपयोगी माने जाते हैं। शिक्षा अनूक पहलू गतिशील नियोजन के आधार पर विकसित किए जाते हैं, शिक्षा के छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक इस प्रकार के नियोजन का लाभ उठाया जा सकता है।
  6. स्थिर नियोजन - शिक्षा की वे योजनाएँ जिनका निर्माण कर तो लिया जाता है, किंतु उनमें परिवर्तन करना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है। इस प्रकार की योजनाएँ स्थिर नियोजन के अंतर्गत आती हैं, किंतु यह वे योजनाएँ होती हैं, जो देखने में तो कठोर लगती हैं, किंतु अच्छा लाभ देती हैं, इसलिए अन्य योजनाओं की तुलना में इसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
  7. शिक्षा की सभी शाखाओं के विकास हेतु नियोजन - जब योजनाओं का निर्माण शिक्षा की सभी शाखाओं को एक साथ विकास करने के लिए बनाई जाती हैं, तो उसे सभी की शिक्षा की सभी शाखाओं के विकास हेतु नियोजन कहा जाता है। जिसमें प्रमुख रुप से पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक, विश्वविद्यालय,  टेक्निकल शिक्षा, महिला, अपंग और सामाजिक शिक्षा से संबंधित विभिन्न प्रकार की व्यवसायिक शिक्षा के लिए योजनाएं तैयार की जाती है और इन सभी को विकास की दृष्टि से एक साथ जोड़ा जाता है और समन्वित विस्तृत योजना तैयार हो जाती है।
  8. आवश्यकता पर आधारित नियोजन - सभी देशों की आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं, इसीलिए शिक्षा भी प्रत्येक देश की अलग-अलग प्रकार की होती है। अनेक पिछड़े देशों की शिक्षा योजना को आधार बनाकर उसमें स्वयं की आवश्यकता,साधनों,सामग्री सुविधाओं के अनुसार परिवर्तन करके प्रगति हेतु योजनाएँ बनाया जाना होता है। 
  9. साधन पर आधारित नियोजन - वे सभी योजनाएँ जिनका निर्माण विभिन्न प्रकार के साधनों की उपलब्धता को देखकर किया जाता है, उनको साधन पर आधारित नियोजन के नाम से जाना जाता है। इसमें मुख्य रूप से वित्तीय व्यवस्था, मानवीय साधन आदि को देखकर योजनाओं का निर्माण होता है। ऐसी योजनाओं को उपलब्ध साधनों के आधार पर प्राथमिकता दी जाती है तथा उन्हें क्रियान्वित किया जाता है।
  10. क्षेत्रीय नियोजन - क्षेत्रीय आधार पर होने वाला शिक्षा नियोजन क्षेत्रीय नियोजन के नाम से जाना जाता है। क्षेत्रीय नियोजन स्थानीय स्तर पर, जिले स्तर पर , संभागीय स्तर पर, राज्य स्तर तथा केंद्रीय स्तर पर भी निर्मित किए जाते हैं। क्षेत्रीय योजनाओं का निर्माण एक निश्चित क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं, परिस्थितियों, उपलब्ध साधनों के आधार पर होता है। भारत एक विशाल देश है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों की भाषाओं, आवश्यकताओं, नियमों उपलब्ध साधनों तथा उपकरणों की विभिन्नता अलग-अलग पाई जाती है।
  11. प्रशासकीय नियोजन - शिक्षा प्रशासन के अंतर्गत निरीक्षण, पर्यवेक्षण और नियंत्रण का कार्य होता है। इसलिए प्रशासनिक दृष्टि से निरीक्षण करने पर्यवेक्षण करने तथा नियंत्रण रखने संबंधी जो भी योजनाएँ तैयार होती हैं,उन सभी को प्रशासकीय नियोजन के नाम से जाना जाता है। प्रशासकीय नियोजन में व्यवस्था संबंधित शैक्षिक समस्याओं का निवारण करने के साथ ही शैक्षिक विकास के संबंध में बातों पर योजनाएँ तैयार होती हैं।
  12. वित्त नियोजन - शैक्षिक नियोजन में वित्त नियोजन का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है, क्योंकि बिना वित्त के कोई भी योजना सफल ही नहीं हो सकती, इसलिए शिक्षा की कोई भी योजना जब तक उन योजनाओं को वित्त के आधार पर तैयार ना किया गया हो सारा परिश्रम व्यर्थ हो जाता है, इसीलिए सभी योजनाओं को वित्तीय आधार पर तैयार किया जाना होता है। शिक्षा के कार्यक्रमों के लिए, क्रियाओं को क्रियान्वित करने के लिए, विभिन्न शैक्षिक योजनाओं को बनाने के लिए, शैक्षिक प्रयासों के लिए कितना धन चाहिए शैक्षिक योजनाओं के लिए कौन-कौन से साधन, सामग्री आवश्यक होते हैं, शैक्षिक योजना की कौन-कौन सी मदे हैं, आदि प्रश्नों पर जब तक वित्त नियोजन के अंतर्गत विचार ना किया जाए तब तक किसी भी शिक्षा नियोजन की कल्पना करना आसान नहीं है।
  13. गुणात्मक नियोजन - गुणात्मक नियोजन के अंतर्गत शिक्षा के उन तत्वों के आधार पर योजना तैयार होनी चाहिए जो शिक्षा में गुणात्मक विकास लाने के लिए अति महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके अंतर्गत संपूर्ण शिक्षा की प्रक्रिया, शिक्षार्थी, शिक्षा पाठ्यक्रम आदि पर विचार किया जाता है और योजना तैयार किया जाना होता है।
  14. सांख्यिकी नियोजन - शिक्षा के गुणात्मक विकास करने के लिए संख्यात्मक विकास पर भी विचार होता है, इसके अंतर्गत छात्रों और शिक्षकों को विद्यालय शिक्षा प्रशासकों, निरीक्षकों, पर्यवेक्षकों तथा कर्मचारियों की संख्या आदि पर विचार करके योजनाओं का निर्माण होता है। संख्यात्मक विकास के अंतर्गत विद्यालय भवन, प्रयोगशाला में उपकरण, फर्नीचर तथा अन्य साधन भी आ जाते हैं, जिनकी व्यवस्थाएँ इस योजना में तैयार हो जाती हैं।

दोस्तों यहाँ आपने शैक्षिक नियोजन के प्रकार (Type of Educational Planning) पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. प्रयोगशाला विधि के गुण और दोष
  2. सूक्ष्म शिक्षण क्या है अर्थ तथा परिभाषा
  3. निगमन विधि क्या है उदाहरण

0/Post a Comment/Comments

в