मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र life cycle of female anopheles mosquito



मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र


मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र life cycle of female anopheles mosquito

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत बहुत स्वागत है, इस लेख मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र (life cycle of female anopheles mosquito) में। दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप

मादा ऐनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र के साथ अन्य तथ्यों को जानेंगे। तो आइये दोस्तों करते है, शुरू मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र:-

जल प्रदूषण किसे कहते है

मादा ऐनाफिलीज मच्छर क्या है what is female anopheles mosquito

मादा ऐनाफिलीज मच्छर संघ एनिमेलिया (Animalia) के वर्ग इनसेक्टा (Insecta) का प्राणी है। जिसे मलेरिया रोग का कारक कहा जाता है।

मादा ऐनाफिलीज एक छोटी आकृति का कीट होता है, जिसका जीवन काल 2- 4 दिन होता है। यह कीट नमीयुक्त गर्म स्थानों पर अधिक पाया जाता है।

मादा ऐनाफिलीज के लार में प्लाज्मोडियम नामक मलेरिया का परजीवी होता है, जब मादा ऐनाफिलीज मच्छर मनुष्य को काटता है,

तो यह परजीवी (Parasite) मनुष्य के रक्त में प्रवेश कर जाता है। और मनुष्य मलेरिया ज्वर (Malaria Fever) से संक्रमित हो जाता है।

वायु प्रदूषण क्या है

मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र

मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र life cycle of female anopheles mosquito

मादा एनाफिलीज मच्छर एक ऐसा मच्छर होता है, जो मलेरिया रोग का रोग वाहक कहा जाता है। यह मच्छर नमी युक्त गर्म और अंधेरे स्थानों पर अक्सर प्रजनन (Reproduction) करता है।

मादा एनाफिलीज मच्छर हल्का बादामी रंग का होता है। जबकि इसका शरीर बेलनाकार तथा टांगे बड़ी ही कोमल प्रतीत होती हैं।

मादा एनाफिलीज मच्छर की उड़ान भरने की क्षमता बड़ी लंबी होती है इस मच्छर के उदर पर स्केल्स (scales) नहीं होते।

नर तथा मादा एनाफिलीज मच्छर में कुछ भिन्नता भी होती हैं, जैसे कि नर एनाफिलीज मच्छर के मैक्सिलरी पाल्प प्रोबोसिस से बड़ी और 5 खंड की होती है।

जबकि इसके अंत के 2 खंड चपटे और मुगद्दर के आकार के होते हैं। और मादा एनाफिलीज मच्छर में उपस्थित मैक्सिलरी पाल्प प्रोबोसिस के लगभग बराबर या फिर छोटे ही होते हैं।

इनके भी अंतिम दो खंड चपटे और मुगद्दर के आकार के होते हैं। मादा अनाफिलीज के वक्ष भाग में स्कूटेलम या पंख जो अर्धचंद्राकार होते हैं, उपस्थित होते हैं।

जबकि इसके पिछले सिरे पर बाल पाए जाते हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर की अधिकतर संरचना क्यूलेक्स मच्छर से मिलती-जुलती होती है।

तथा इनकी जीवन चक्र की अवस्थाएँ (life cycle stages) भी लगभग एक समान ही होती हैं। परंतु इन दोनों के जीवन चक्र की कुछ

अवस्थाओं में भिन्नतायें भी देखने को मिलती हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर के जीवन चक्र की अवस्थाएँ निम्न प्रकार से हैं:-

अंडा (Egg) - मादा एनाफिलीज मच्छर के जीवन चक्र की पहली अवस्था अंडा होती है, जो लगभग एक समय में 40 से 100 अंडे तक देती है।

मादा एनाफिलीज मच्छर के अंडों का आकार लगभग नाव के समान होता है। जो पानी में तैरती हुई अवस्था में देखे जा सकते हैं।

यह अंडे अधिकतर स्वच्छ पानी में ही उपस्थित होते हैं, जो पानी में समानांतर तल के सामान तैरते रहते हैं। इन अंडो के पाशर्व सतह पर वायु कोष भी पाए जाते हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर की जीवन चक्र की यह पहली अवस्था होती है।

लार्वा (Larva) - अंडों के बाद मादा एनाफिलीज मच्छर के जीवन चक्र की दूसरी अवस्था लार्वा अवस्था कहलाती है। मादा एनाफिलीज मच्छर का लार्वा पानी की सतह से एक विशेष प्रकार का कोण (Angle) जैसा बनाए रहते हैं।

इसके अलावा इनकी स्वशन नालियाँ भी बहुत लंबी होती हैं। तथा इनका सिर भी लंबा होता है। मादा एनाफिलीज मच्छर के लारवा के आठवे खंड पर बालों की एक प्रकार की संरचना कॉम्ब पाई जाती है। यह लार्वा जल की सतह के नीचे भोजन ग्रहण करता है।

प्यूपा (Pyupa)- मादा एनाफिलीज मच्छर के जीवन की यह अवस्था तीसरी अवस्था होती है, जिसे प्यूपा के नाम से जाना जाता है। मादा एनाफिलीज मच्छर के शवशन श्रृंग की श्वास नली छोटी होती है।

जबकि प्यूपा के उदर वाले हिस्से पर एक सिरे पर एक पतवार पर विशाल तथा छोटा बाल होता है। प्यूपा का रंग हरा होता है, जबकि प्यूपा के आखरी खंड पर खूटे के समान कांटे उपस्थित होते हैं।

कायांतरण (Metamorphosis) - मादा एनाफिलीज मच्छर की जीवन चक्र की यह सबसे आखरी अवस्था होती है। जिसे कायांतरण कहा जाता है, सबसे पहले अंडे से लार्वा निकलता है, और लार्वा से प्यूपा बनता है, और प्यूपा से अंततः व्यस्क मच्छर बन जाता है।





मादा एनाफिलीज मच्छर के जीवन चक्र में प्यूपा एक ऐसी अवस्था होती है, जो तापक्रम के अनुसार 2 से केवल 7 दिनों तक ही रहती है।

इस समय अवधि में इसके आंतरिक अंगों में बहुत ही जल्दी परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन ऊतक जनन क्रियाओं के द्वारा ही होता है, और प्यूपा के शरीर में ही पूरा होता है। जिससे यह एक वयस्क (Adult) मच्छर में परिवर्तित हो जाता है।

वयस्क (Adult)  - जब प्यूपा कायान्तरित में बदल जाता है, तो वह बहुत समय तक जल पर तैरता रहता है। प्यूपा के बाह्य कंकाल पर शवशन श्रृंग के बीच में एक दरार के फटने पर पूरा मच्छर बाहर आ जाता है।

इस समय इसके पँख और पैर कोमल होते है। किन्तु कुछ समय यह किसी निर्जीव भित्ति पर बैठकर अपने पँख सुखाता है, और वयस्क में बदल पूर्ण मच्छर बन जाता है।

प्लाज्मोडियम के लक्षण Symptoms of Plasmodium

  1. प्लाज्मोडियम एक प्रकार से पूरी तरह परजीवी (Parasite) तथा माइक्रोस्कोपिक जीव होता है।
  2. प्लाज्मोडियम की पहली अवस्था जिसे वास्तविक अवस्था कहते हैं, उस अवस्था का नाम ट्रोफोजोइट (Trophozoite) है, जो एक कोशिकीय तथा आकार में गोल होता है।
  3. ट्रोफोजोइट के चारों ओर एक दोहरी झिल्ली होती है जिसके के अंदर नाभिक, कोशिका द्रव्य, एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम, माइट्रोकांड्रिया गॉलजी उपकरण आदि अंगक पाए जाते हैं।
  4. प्लाज्मोडियम अपना अलैंगिक चक्र (Asexual cycle) मनुष्य में तथा लैंगिक चक्र (Sexual cycle) मादा एनाफिलीज मच्छर में पूरा करता है।
  5. प्लाज्मोडियम की संक्रमणकारी अवस्था स्पोरोजोइट (Sporozoite) होती है, जो मादा एनाफिलीज मच्छर की लार में पाई जाती है। मादा एनाफिलीज मच्छर मनुष्य को काटता है तो रक्त चूसते समय मनुष्य के रक्त में यह संक्रमणकारी अवस्था प्रवेश कर जाती है। 
  6. प्लाज्मोडियम की स्पोरोजोइट अवस्था का नाभिक लंबा तथा अन्य कोशिकांग फैले हुए होते हैं, तथा या तुर्क रूप के जैसा दिखाई देता है। 

मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है मलेरिया Malaria is caused by the bite of female Anopheles mosquito 

मलेरिया (Malaria) एक संक्रमण रोग माना जाता है, जो एक विशेष प्रकार के परजीवी प्लाज्मोडियम के द्वारा फैलता है। इसका रोग कारक या वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है।

यह प्लाज्मोडियम परजीवी (Plasmodium parasite) मनुष्य में चार प्रकार का संक्रमण या चार प्रकार से प्रभावित करते हैं

जैसे कि प्लाज्मोडियम फालसीफेराम, प्लाज्मोडियम वाइबैक्स, प्लाज्मोडियम, ओवेल और प्लाज्मोडियम मलेरियाई जिसमें से सबसे खतरनाक प्लाज्मोडियम फलसीफैरम होता है।

जब मादा एनाफिलीज मच्छर मनुष्य को काटता है, तो मादा एनाफिलीज मच्छर के लार में प्लाज्मोडियम उपस्थित होता है।

जो काटने के द्वारा मनुष्य के रक्त में प्रवेश कर जाता है। मनुष्य के रक्त में प्रवेश करने पर यह प्लाज्मोडियम अपनी संख्या बढ़ाने लगता है,

जिसके कारण ठंड लगना, हाथ पैर फूलना, जम्हाई लेना, घबराहट होना,उल्टी आना, चक्कर आना आदि कई प्रकार के लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं।

तेज बुखार के साथ ठंड लगना यहाँ तक कि इस बीमारी में रोगी की मृत्यु हो जाती है। इस रोग को मलेरिया रोग कहा जाता है।

मलेरिया रोग उन स्थानों पर अधिकतर होता है, जहाँ पर गंदगी होती है। क्योंकि प्लाज्माडियम का वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर (Anopheles mosquito)  गंदे स्थानों पर अधिक उत्पन्न होते हैं।

मलेरिया रोग से बचने के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव तथा स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। अनावश्यक पानी का भराव निकाल देना चाहिए जिससे पानी में मच्छर उत्पन्न ना होने पाए।

मच्छर का वैज्ञानिक नाम scientific name of mosquito

मच्छर एक छोटे आकर का जीव होता है। जो मलेरिया डेंगू तथा काला अजार सहित कई घातक बीमारियों का वाहक होता है। मच्छर की भी कई प्रजातियाँ होती है।

जैसे मादा एनाफिलीज मच्छर, क्यूलेक्स मच्छर आदि। मच्छर का वैज्ञानिक नाम कुलीकोडिया (kulikodia) है जो संघ एनिमेलिया के अंतर्गत इनसेक्टा वर्ग (Class-Insecta) से आता है।

दोस्तों इस लेख में आपने मादा एनाफिलीज मच्छर का जीवन चक्र ((life cycle of female anopheles mosquito) के साथ मच्छर का वैज्ञानिक नाम आदि पड़ा। आशा करता हुँ यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. प्लाज्मोडियम क्या है
  2. वृषण और अंडाशय के कार्य
  3. अग्नाशय किसे कहते है, इसके होर्मोन्स


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