माध्यमिक शिक्षा आयोग के गुण और दोष Merits and Demerits Secondary Education Commission
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख माध्यमिक शिक्षा आयोग के गुण और दोष (Merits and Demerits of Secondary Education Commission) में।
दोस्तों इस लेख द्वारा आज आप माध्यमिक शिक्षा आयोग की सिफारिशों के गुण और दोष माध्यमिक शिक्षा आयोग के मूल्यांकन द्वारा जान पायेंगे, तो आइये शुरू करते है, यह लेख माध्यमिक शिक्षा आयोग के गुण और दोष:-
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माध्यमिक शिक्षा आयोग का मूल्यांकन Secondary Education Commission Evaluation
माध्यमिक शिक्षा आयोग अर्थात डॉक्टर मुदालियर आयोग जिसमें प्रमुख डॉ मुदालियर ने विभिन्न प्रकार की सिफारिशों के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा की प्रगति का मापन किया है, इसलिए मुदालियर जी की सिफारिशों को माध्यमिक शिक्षा की
प्रगति का मानदंड कहा जाता है। इनसे समसामयिक शिक्षाविदों ने पूर्ण सहमति प्रकट की थी, परंतु कुछ विद्वानों ने इन सुझावों की आलोचना भी की थी। अतः आयोग का सही मूल्यांकन उनके गुण और दोषों का तुलनात्मक अध्ययन के द्वारा ही संभव हो सकता है।
माध्यमिक शिक्षा आयोग के गुण Merits of Secondary Education Commission
माध्यमिक शिक्षा आयोग के गुण निम्न प्रकार से हैं:-
- माध्यमिक शिक्षा आयोग का आदर्श वाक्य था "लोकतांत्रिक नागरिकता का विकास करना" अर्थात भारत के सभी नागरिकों में लोकतंत्र के सभी प्रकार के गुणों का समावेश करना और यह मूलमंत्र आदर्श वाक्य इस आयोग का संपूर्ण उद्देश्य की शाब्दिक अभिव्यक्ति भी करता है।
- आयोग ने बालकों की व्यक्तिगत विभिन्नताओं के आधार पर शिक्षा की व्यवस्था लागू करने पर बल दिया, जिससे सभी प्रकार के बालकों का विकास संभव हो सके।
- माध्यमिक शिक्षा आयोग का बहुउद्देशीय स्कूलों की स्थापना करने का प्रत्यय इसकी व्यापक व्यवहारिकता परिचायक है।
- ग्रामीण स्तर पर ग्रामीण विद्यालयों की आवश्यकता और उनमें कृषि और कृषि संबंधित पाठ्यक्रमों को चलाया जाने का सुझाव एक अतुलनीय सुझाव था।
- प्राविधिक शिक्षा व्यवस्था को लागू करने का सुझाव माध्यमिक शिक्षा आयोग का अति प्रशंसनीय सुझाव माना जाता है।
- विभिन्न बड़े-बड़े ओधोगों पर लगाए जाने वाले औद्योगिक कर औद्योगिक शिक्षा में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में बहुत ही महत्वपूर्ण कदम निभाने वाला सुझाव माध्यमिक शिक्षा आयोग का था।
- शिक्षण विधियों को क्रियात्मक शिक्षण द्वारा छात्र उपयोगी बनाना पारंपारिक शिक्षण विधियों में परिवर्तन करना और उनमें सुधार लाकर फिर से उन्हें लागू करना।
- माध्यमिक शिक्षा आयोग के द्वारा छात्रों के सर्वागीण विकास,चरित्र निर्माण और अनुशासन संबंधित सुझाव प्रस्तुत करके सराहनीय कार्य किया
- छात्रों के लिए निर्देशन एवं परामर्श व्यवस्था को लागू करके इस स्तर की शिक्षा को अधिक सार्थक बनाने का प्रयास किया आयोग ने परीक्षा पद्धति में आमूल-चूल परिवर्तन करके अधिक उद्देश्य पूर्ण बनाने का प्रयास किया।
माध्यमिक शिक्षा आयोग के दोष Defects of Secondary Education Commission
माध्यमिक शिक्षा आयोग के द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सिफारिशों की आलोचना भी हुई है। विभिन्न शिक्षाविदों ने अपने-अपने तर्कों के आधार पर माध्यमिक शिक्षा आयोग की सिफारिशों की आलोचना की है, इसीलिए कुछ निम्न प्रकार के माध्यमिक शिक्षा आयोग की सिफारिशों के दोषों को यहाँ पर वर्णित किया गया है:-
- माध्यमिक शिक्षा संकुचित और एकांगी थी इसी कारण से छात्रों के सर्वागीण विकास में असमर्थ हो गई जबकि इसका केवल शिक्षा से ही संबंध था विद्यार्थी सामाजिक जीवन में किसी भी प्रकार का सामंजस्य माध्यमिक शिक्षा के द्वारा स्थापित नहीं कर सकता था।
- आयोगों के अनेक सुझाव पूर्ण आयोगों एवं समितियों की पुनरावृत्ति मात्र हैं।
- माध्यमिक शिक्षा आयोग ने स्त्री शिक्षा के महत्वपूर्ण पक्ष को ना तो उठाया है और ना ही इसकी कोई प्रभावी चर्चा अपनी सिफारिशों में की है यह इसका एक प्रमुख दोष माना जाता है।
- इंटरमीडिएट कक्षा को दो खंडों में बांटने का माध्यमिक शिक्षा आयोग का सुझाव कुछ तर्कपूर्ण नहीं जान पड़ता है, क्योंकि इस योजना में शिक्षा का प्रबंध करना और उसके अनुरूप आर्थिक व्यय की व्यवस्था करना दोनों ही अनुपयुक्त है।
- माध्यमिक शिक्षा आयोग द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम इंटरमीडिएट के छात्रों के लिए अधिक बेहतर और अनुपयुक्त प्रतीत होते हैं, जबकि बालक तथा बालिकाओं के पाठ्यक्रम में विभिन्न प्रकार के भेद भी देखने को दिखाई देते हैं।
- माध्यमिक शिक्षा में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी भाषा को अनिवार्य कर दिया गया था, इसीलिए अंग्रेजी के अध्ययन में भारतीय विद्यार्थियों को अधिक परिश्रम करना पड़ता था जिससे समय और शक्ति दोनों का ही उपव्यय हुआ।
दोस्तों आपने यहाँ पर माध्यमिक शिक्षा आयोग के गुण और दोष (Merits and Demerits Secondary Education Commission) के साथ मूल्यांकन तथा अन्य तथ्यों को पढ़ा, आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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