पीसीआर क्या है इसका महत्व What is PCR its important
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख पीसीआर क्या है इसका महत्त्व में (What is PCR its important) दोस्तों
आज आप एक विज्ञान के प्रमुख टॉपिक पीसीआर के बारे में जानेंगे कि पीसीआर क्या होता है? पी सी आर का फुल फॉर्म क्या होता है और विज्ञान में पीसीआर का क्या महत्व है तो आइए दोस्तों बढ़ते हैं, इस लेख में पीसीआर क्या है इसका महत्व:-
पीसीआर तकनीक क्या है what is PCR
पॉलीमरेस श्रृंखला अभिक्रिया जिसे पीसीआर तकनीकी (PCR Technology) के नाम से जाना जाता है, एक जीन संवर्धन करने वाली प्रयोगशाला तकनीकी है।
पॉलीमरेस श्रृंखला अभिक्रिया को सर्वप्रथम कैरी पुलिस ने 1984 में विकसित किया था। इस तकनीक की सहायता से बहुत ही कम समय में वांछित डीएनए खंड की कई लाख प्रतियाँ
संश्लेषित (Synthetise) की जा सकती हैं, इसीलिए इस अभिक्रिया को पीपुल्स च्वाइस अभिक्रिया के नाम से भी जाना जाता है।
इस तकनीकी के विकास के फलस्वरुप जीन संवर्धन हेतु उसे किसी वैक्टर की सहायता से किसी कोशिका में क्लोन करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, और कुछ ही समय में वांछित डीएनए खंड की कई लाख प्रतियाँ प्राप्त हो जाती हैं।
पीसीआर का पूरा नाम क्या है full name of PCR
पीसीआर का पूरा नाम पॉलीमरेस श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase chain reaction) होता है, जो एक विज्ञान की तकनीक है, जिसमें किसी बांक्षित डीएनए खंड की कुछ ही समय में लाखों प्रतियाँ प्राप्त हो जाती है।
पॉलीमरेस श्रृंखला अभिक्रिया का सिद्धांत Principle of PCR
पॉलीमरेस श्रृंखला अभिक्रिया 3 चरणों में संपन्न होती है, जिसका पहला चरण विकृतिकरण दूसरा पुनप्रकृतिकरण और तीसरा चरण संश्लेषण का होता है।
पहले चरण विकृतिकरण में डीएनए (DNA) के दोनों खंडों अर्थात सूत्रों को अलग-अलग कर दिया जाता है और एकल सूत्रों में उन्हें विकृत कर देते हैं।
इसके पश्चात दूसरे चरण पुनप्रकृतिकरण में प्रत्येक डीएनए खंड को प्राइमर के साथ संकरित कराया जाता है। इसके पश्चात तीसरा चरण संश्लेषण में डीएनए पॉलीमरेस एंजाइम की सहायता
के द्वारा प्राइमर टेंपलेट वैध से डीएनए का संश्लेषण किया जाता है। इस प्रकार से इन तीनों चरणों की बार-बार पुनरावृति करने के पश्चात डीएनए की हजारों लाखों प्रतियाँ बहुत ही कम समय में प्राप्त हो जाती हैं।
पीसीआर की क्रियाविधि Mechanism of PCR
पॉलीमरेस श्रृंखला अभिक्रिया की क्रियाविधि के लिए निम्न प्रकार की सामग्री की आवश्यकता होती है:-
वांछित डीएनए (10-35kbp लंबे) जिसका प्रवर्धन करना होता है।
दो 15-35 न्यूक्लियोटाइड लंबे ओलिगोन्यूक्लियोटाइड प्राइमर जो वांछित डीएनए के दोनों स्तरों के पूरक हों।
चारों प्रकार के डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिकटाइड अर्थात डीएडीपी (dATP) डीजीटीपी (dGTP) डीसीटीसी (dCTP) और डीटीटीपी (dTTP)
एक उच्च ताप स्थिर डीएनए पॉलीमरेस एंजाइम जो 95 डिग्री सेंटीग्रेड तक का ताप सहन कर सके। जैसे कि थरमस एक्वैटिकस से अलग किया गया Taq पॉलीमरेस जिसका अनुकूलतम तापमान 75 डिग्री सेंटीग्रेड होता है इसके अतिरिक्त Pfu पॉलीमरेस Vent पॉलीमरेस का भी उपयोग हो सकता है।
अब इन चारों वस्तुओं को आसानी से मिश्रित कर लिया जाता है, इससे जो मिश्रण तैयार होता है, उसे अभिक्रिया मिश्रण कहते हैं। इसके पश्चात निम्न प्रकार के तीनों चरण उपयोग में लाए जाते हैं:-
- विकृतिकरण :- इसमें अभिक्रिया मिश्रण को 1 मिनट के लिए 90 से 95 डिग्री सेंटीग्रेड ताप पर गर्म किया जाता है जिसके फलस्वरूप डीएनए (DNA) के दोनों खंड दोनों सूत्र अलग अलग हो जाते हैं।
- पुनरप्रकृतिकरण - इस चरण में विकृतिकरण के उपरांत जो मिश्रण प्राप्त होता है, अर्थात जो डीएनए खंड अलग अलग हो जाते हैं, उस मिश्रण को फिर से धीरे-धीरे 55 से 60 डिग्री सेंटीग्रेड तक ठंडा किया जाता है, जिसके फलस्वरूप डीएनए सूत्रों के दोनों सिरों के दोनों पूरक क्षेत्रों से प्राइमर जुड़ जाते हैं। इस क्रिया को एनीलिंग anniling) कहा जाता है।
- संश्लेषण :- यह तीसरा चरण होता है, इस चरण में प्रत्येक प्राइमर के 3-hydroxyl सिरे डीएनए का संश्लेषण प्रारंभ कर देते है। डीएनए सूत्र के पूरक क्षारकों द्वारा प्राइमरों का विस्तार होने लगता है। संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान डीएनए पॉलीमरेस एंजाइम से संबंधित अनुकूलतम ताप का बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होता है। 95 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास अभिक्रिया रुक जाती है, डीएनए संश्लेषण के दौरान हर एक प्राइमर से जुड़कर जो नया डीएनए सूत्र बनता है वह दूसरे प्राइमर के पूरक अनुक्रम से आगे तक निकला रहता है। इन नए सूत्रों को लंबा टेंपलेट के नाम से जाना जाता है। यह लंबे टेंपलेट अगले चक्र में उपयोग में लाए जाते हैं, जहाँ पर पीसीआर का प्रथम चक्र पूरा हो जाता है। पीसीआर के प्रत्येक चक्र को पूरा होने में लगभग 3 से 6 मिनट का समय लगता है। अब दूसरे चक्र का प्रवर्धन प्रारंभ होता है, इसके लिए डीएनए सूत्रों को विकृत करके प्राइमरो के साथ एनील करके संश्लेषित कराते हैं। इस द्वितीय चक्र के अंत में डीएनए सूत्रों की संख्या 4 गुनी हो जाती है। अब तीसरा चक्र आरंभ होता है और इस बार फिर से विकृतिकरण पुनरप्रकृतिकरण और संश्लेषण की प्रक्रिया होती हैं, जिसके अंत में डीएनए सूत्रों की संख्या 8 गुना हो जाती है। अब यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है, इस प्रकार से 22 वें चक्र के अंत में डीएनए की लगभग 101/2 लाख प्रतियाँ प्राप्त हो जाती हैं। पीसीआर के लिए आज के समय में पूरी तरह से स्वचालित मशीने बाजार में उपलब्ध हो चुकी हैं, जिन्हें थर्मल चक्र के नाम से जाना जाता है,इनमें लगा माइक्रोप्रोसेसर तापीय चक्रों का नियमन करता है।
पीसीआर का महत्व क्या है what is importance of PCR
पीसीआर का उपयोग जीनों के परिचालन जीनों की अभिव्यक्ति और उनसे संबंधित अध्ययन में किया जाता है, क्योंकि पीसीआर से किसी भी जीन की असंख्य प्रतियाँ बहुत ही कम समय में प्राप्त की जा सकती हैं।
पीसीआर पॉलीमर एक श्रृंखला अभिक्रिया का उपयोग डीएनए अनुक्रमण में किया जाता है।
पीसीआर के द्वारा यादृच्छिक प्राइमरों की सहायता से 2 जीवों के जीनोमो में अंतर आसानी से किया जा सकता है, अतः उदीकासीय जीव विज्ञान या जाति व्रत विज्ञान संबंधी अध्ययनों में पीसीआर का महत्व सबसे अधिक होता है।
पीसीआर का महत्व मानव की अनेक व्याधियों का निदान करने में भी होता है। जीवाणु एवं विषाणु से होने वाले संक्रमण तथा कैंसर आदि का निवारण भी पीसीआर की सहायता से किया जा सकता है।
पीसीआर द्वारा किसी भी स्रोत से प्राप्त डीएनए के एक अणु का प्रवर्धन करके किसी अपराध से संबंधित न्यायिक जांच की जा सकती है।
दोस्तों आपने इस लेख में पीसीआर तकनीक क्या है (what is PCR Technology) पीसीआर क्या है इसका महत्व के साथ ही अन्य तथ्यों के बारे में जाना आशा करता हूँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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