मानव रुधिर वर्ग / रुधिर वर्ग कितने प्रकार के होते है human blood group
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख मानव रुधिर वर्ग /रुधिर वर्ग कितने प्रकार के होते है (Human blood group) में।
यहाँ पर आप एंटीजन क्या है? एंटीबाडी क्या है? रुधिर वर्ग का निर्धारण के साथ अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को जान पाएंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख मानव रुधिर वर्ग / रुधिर वर्ग कितने प्रकार के होते है:-
इसे भी पढ़े:- रक्त कणिकाओं के प्रकार तथा कार्य Type of blood cell and function
रुधिर क्या है What is blood
रुधिर को रक्त लहू खून तथा blood के नाम से जाना जाता है, जो एक तरल संयोजी ऊतक होता है तथा सम्पूर्ण शरीर में बहता है। रक्त में तीन प्रकार की कणिकाएँ लाल रक्त कणिका (Red Blood Cell) श्वेत रक्त कणिका (White Blood Cell) के आलावा बिम्बाणु (Platelet) होती है,
जबकि कई खनिज लवण तथा प्रोटीन के साथ अन्य कार्बनिक तथा अकार्बनिक तत्व पाए जाते है। रक्त शरीर के विभिन्न भागो में ऑक्सीजन भोजन जल तथा अन्य पाचक रसो और होर्मोन का स्थानांतरण करता है।
रुधिर वर्ग की खोज किसने की Who discovered blood group
मनुष्य में चार प्रकार के रुधिर वर्ग पाए जाते हैं, जिनमें रुधिर वर्ग A. B. AB और O होते है, जो रक्त में उपस्थित एंटीजन और एंटीबॉडी पर निर्भर करते हैं। रुधिर वर्ग की खोज सन 1900 में महान वैज्ञानिक कार्ल लैंड स्टीनर ने की थी, उन्होंने अध्ययन करने के पश्चात बताया था, कि मनुष्य की लाल रुधिर कोशिकाओं अर्थात आरबीसी (RBC) में पाई
जाने वाली एक विशेष प्रकार की प्रोटीन जिसे ग्लाइकोप्रोटीन (Glycoprotein) के नाम से जानते हैं वह उपस्थित होती है और उसको ही एंटीजन (Antigen) कहते हैं,
जो दो प्रकार के होते हैं एंटीजन A और एंटीजन B उनकी ही उपस्थिति अनुपस्थिति के आधार पर मनुष्य में चार प्रकार के रुधिर वर्ग पाए जाते हैं।
एंटीजन और एंटीबॉडी क्या होते हैं what are antigens and antibodies
एंटीजन और एंटीबॉडी विशेष रूप से मनुष्य के शरीर में पाए जाने वाले वह प्रोटीन हैं जो किसी भी मनुष्य के रुधिर वर्ग को निर्धारित करने के लिए आवश्यक होते हैं साधारण रूप से कह सकते हैं जब कोई बाहरी जीव किसी व्यक्ति के शरीर में पहुंचता है तो वह है
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ प्रोटीन यौगिकों का निर्माण करता है और यह प्रोटीन यौगिक उस जाति के विशिष्ट होते है। साधारण भाषा में कह सकते है बाह्य कारको द्वारा शरीर में प्रवेश होने पर जटिल कार्बनिक अणुओ का निर्माण होना जो प्रोटीन होते है
और हम उन्हे एंटीजेंस के नाम से जानते हैं। इसके पश्चात ऊतकों के द्वारा अन्य प्रोटीन अणुओ का भी संश्लेषण होने लगता है,जो एंटीजन से संयुक्त होते हैं या उस पर अभिक्रिया करते हैं। साधारण भाषा में कह सकते हैं कि हमारे शरीर में
विभिन्न रोग प्रतिरोधक क्षमता में बाधा डालने वाले पदार्थ या फिर रोग उत्पन्न करने वाले पदार्थ एंटीजन कहलाते हैं, जो लाल रक्त कणिका (Red Blood Cell) में पाए जाते है, तथा A or B प्रकार के होते है।
वही शरीर में प्लाज्मा में संश्लेषित दूसरे प्रकार के प्रोटीन के बड़े कणो को एंटीबॉडी के नाम से जाना जाता है, जो a और b प्रकार की होती है। एंटीबॉडी श्वेत रक्त कणिकाओं (White blood cell) अर्थात डब्ल्यूबीसी में गामा ग्लोब्यूलिन प्रोटीन के रूपांतरण के फलस्वरुप संश्लेषित होती तथा विशेष प्रतिक्रिया के फल स्वरुप एंटीजन को नष्ट करते हैं।
![]() |
| Credit to IMF IAS |
मनुष्य में रुधिर वर्ग का निर्धारण Determination of blood group in humans
मनुष्य के रक्त में आरबीसी अर्थात लाल रक्त कोशिकाएं पाई जाती हैं, जिनमें एंटीजन A और B भी होता है और इन एंटीजन के आधार पर ही मनुष्य के रुधिर वर्ग का निर्धारण किया जाता है, जबकि प्लाज्मा में एंटीबॉडी a और b होती है, जो रुधिर वर्ग के निर्धारण में सहायता करते हैं।
- यदि किसी व्यक्ति के लाल रक्त कणिका में एंटीजन A है तो उसके रक्त प्लाज्मा में एंटीबॉडी b उपस्थित होगा इस प्रकार से उस व्यक्ति का रक्त वर्ग A होगा।
- यदि किसी व्यक्ति के लाल रक्त कणिका में एंटीजन B है तो रक्त में एंटीबॉडी a उपस्थित होगी, इस प्रकार से उस व्यक्ति का रुधिर वर्ग B होगा।
- यदि किसी व्यक्ति के लाल रक्त कणिका में एंटीजन A और B दोनों उपस्थित है तो उसके रक्त प्लाज्मा में एंटीबॉडी कोई भी नहीं होगी, इस प्रकार से उस व्यक्ति का रुधिर वर्ग AB होगा।
- यदि किसी व्यक्ति के लाल रक्त कणिका में कोई भी एंटीजन उपस्थित नहीं है, जबकि एंटीबॉडी a और b दोनों उपस्थित हैं उस व्यक्ति का रक्त वर्ग O होगा।
मनुष्य में रक्त आधान Blood transfusion in humans
मनुष्य के रक्त के रुधिर वर्गों में किसी भी प्रकार का रक्त अभिविश्लेषण नहीं होता है साधारण शब्दों में कहा जा सकता है कि किसी के रुधिर वर्ग के अनुरूप एंटीबॉडीज और एंटीजन नहीं होते जैसे कि एंटीजन A के साथ एंटीबॉडी A नहीं हो सकता और एंटीबॉडी B के साथ एंटीजन B नहीं हो सकता रुधिर वर्ग के रक्त को किसी ऐसे रुधिर वर्ग के रक्त में मिश्रित कर दिया जाए
जिसमें अनुरूप एंटीजेंस एवं एंटीबॉडीज उपस्थित हैं तो लाल रक्त कणिकाएं अभिश्लेषण हो जाएगी। माना कि A रुधिर वर्ग के रक्त का रुधिर वर्ग B के रक्त में मिश्रण कर दिया जाए तो लाल रक्त कोशिकाओं का अभिश्लेषण हो जाता है।
लाल रक्त कोशिकाएं एक दूसरे से चिपक जाती हैं इसको ब्लड क्लोटिंग या रक्त का जमना (Blood Clotting) भी कह सकते हैं इस प्रकार के स्थिति में रक्तवाहिनियों में रक्त अवरोध उत्पन्न होने लगते हैं और प्राणी की मृत्यु हो जाती है इसलिए जब रक्त आधान किया जाता हो तो एंटीजन और एंटीबॉडी का तालमेल रखना बहुत ही आवश्यक होता है।
माता-पिता के रक्त समूह के द्वारा बच्चों में संभावित रक्त समूह
माता पिता में बच्चों में संभावित बच्चों मेंरक्त समूह असंभावितO×O O A. B. AB.O×A O, A B, ABO ×B O. B A, ABO×AB AB O, ABA×A A, O B, ABA×B A, B, O, AB कोई नहींA×AB A, B, AB OB×B B, O A, ABB×AB A, B, AB OAB×AB A, B, AB O
इनमें जो रक्त वर्ग O रुधिर वर्ग के लोग हैं, उनको सार्वभौमिक दानकर्ता के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इनमें किसी भी प्रकार का कोई भी एंटीजन नहीं होता है और इसका आधान किसी भी रक्त वर्ग को करना आसानी से हो सकता है।
इसी प्रकार से रक्त समूह AB सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इनमें किसी भी प्रकार की एंटीबॉडी (Antibody) उपस्थित नहीं होती और इनके शरीर में किसी भी वर्ग के रक्त का रक्त आसानी से चढ़ाया जा सकता है।
आरएच फैक्टर RH factor
Blood transfusion में आरएच फैक्टर भी एक प्रमुख भूमिका निभाता है, जो एक विशेष प्रकार का एंटीजन प्रोटीन होता है, जिसकी खोज लैंड स्टीनर तथा वीनर (Land steiner and wiener) नामक वैज्ञानिक ने 1940 में रीसस (Rhesus) नामक वानर में की थी और उस एंटीजन का नाम RH फैक्टर उस वानर के नाम पर ही रख दिया गया।
उन्होंने अध्ययन करने के पश्चात बताया कि जिन व्यक्तियों के रक्त में आरएच फैक्टर पाया जाता है उनका रक्त आरएच पॉजिटिव (Rh+) के नाम से जाना जाता है और जिनके रक्त में आरएच फैक्टर नहीं पाया जाता है तो उनका रक्त आरएच नेगेटिव (Rh-) होता है।
जब रक्त वर्ग की जांच की जाती है तो आरएच फैक्टर की भी जांच की जाती है, क्योंकि आरएच पॉजिटिव फैक्टर वाले व्यक्ति को आरएच पॉजिटिव तथा आरएच नेगेटिव वाले व्यक्ति को
आरएच नेगेटिव के रक्त का आधान नहीं किया जा सकता एक बार ऐसा कर भी दिया जाए तो कोई प्रभाव नहीं होता, किंतु दूसरी बार करने पर आरएच नेगेटिव वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
एरीथोब्लास्टोसिस फेटलिस Erythroblastosis fetalis
यह एक विशेष प्रकार की स्थिति होती है, जो रक्त समूह और आरएच फैक्टर से संबंधित होती है। यदि पिता का रक्त आरएच पॉजिटिव हो और माता का रक्त आरएच नेगेटिव हो तो प्रथम संतान सामान होती है, किंतु उसके पश्चात जन्म लेने वाले शिशु की जन्म से पहले ही गर्भ अवस्था में मृत्यु हो जाती है।
दोस्तों आपने यहाँ पर मानव रुधिर वर्ग / रुधिर वर्ग कितने प्रकार के होते है (human blood group) के साथ अन्य तथ्यों को पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
इसे भी पढ़े:-
- रक्त क्या है रक्त का संगठन तथा कार्य What is blood
- रक्त दाब क्या है इसके प्रकार What is blood pressure
- आयरन सीरप के फायदे Benifits of Iron Syrup
- एचआईवी एड्स के कारण तथा लक्षण Causes and Symptoms of HIV Aids

Post a Comment