परागण के उदाहरण Pollination Example in hindi

परागण के उदाहरण Pollination Example in hindi

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे एक लेख परागण के उदाहरण परागण की परिभाषा (Pollination Example in hindi) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप कुछ पौधों के पुष्पों में परागण के उदाहरण जानेंगे तो आइए दोस्तों करते हैं शुरुआत परागण के उदाहरण:-

परागण की परिभाषा Defination of pollination 

परागकणों का पराग कोष से विभिन्न माध्यमों के फलस्वरुप उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर या अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुंचना जिससे निषेचन तथा बीजों का उत्पादन हो।

परागण के उदाहरण

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साल्विया में परागण Pollination in salvia

साल्विया नामक पौधा लेबिलिटी कुल का पौधा होता है जिस की प्रमुख विशेषता होती है, कि इसके दो ओष्ठ होते हैं। इस पौधे का ऊपरी ओष्ठ दो दलों से मिलकर बना होता है, जो ऊपर से कुछ मुड़ा हुआ होता है

और इसमें नर तथा मादा जननांग पाए जाते हैं, जबकि निचला ओष्ठ तीन दलों के मिलने से बनता है, जो कीटों के लिए मंच का कार्य करता है।

सालविया पौधों के पुष्प में दो पुंकेसर पाए जाते हैं और यह अंडप से पहले ही परिपक्व हो जाते हैं। पुंकेसर में पाए जाने वाला पुतंतु बहुत छोटा होता है,

जबकि इसका योजी लंबा होता है और यह योजी पुतंतु के ऊपर लीवर की तरह कार्य करता है। पुष्प के मकरंद कोष से पहले एक लीवर प्लेट होती है, जिसका सीधा संबंध पुंकेसर से रहता है।

जैसे ही कोई कीट पुष्प से शहद लेने के लिए लीवर प्लेट के ऊपर आता है, तो पुंकेसर के योजी में गति आरंभ हो जाती है और उर्वर परागकोष से परागकण निकलते हैं और कीट की पीठ और पंखों पर जमा हो जाते हैं।

जब यह कीट उस पुष्प से शहद प्राप्त कर लेता है और दूसरे पुष्प पर जाता है ( जिसका अंडप परिपक्व हो चुका है और वर्तिकाग्र ऊपरी ओष्ठ से बाहर निकल आया है) तो वह पुष्प से शहद लेने के लिए पुष्प

के अंदर प्रवेश करने लगता है और उस कीट के पीठ तथा पंखों पर लगे परागकण वर्तिकाग्र के संपर्क में आकर ग्रहण कर लिए जाते हैं, इस प्रकार से साल्विया में कीट परागण होता है।

अंजीर में परागण Pollination in Anjeer 

अंजीर पौधे के पुष्प एक खोखले नाशपाती के आकार के उदुम्बरक पुष्पक्रम के द्वारा घिरे हुए रहते हैं और इस संरचना को रिसेप्टिकल के नाम से जाना जाता है।

इस रिसेप्टेकल में एक गहरा और सकरा द्वार भी होता है, जिस द्वार के द्वारा कीट उसमें प्रवेश करता है। इसमें तीन प्रकार के पुष्प अर्थात नर, मादा तथा गॉल होते हैं,

जिनमें रिसेप्टेकल में नर पुष्प द्वार के शीर्ष पर स्थित होते हैं, जबकि नीचे की ओर लंबी बर्तिका वाले पुष्प होते हैं, जो मादा पुष्प कहलाते हैं, तथा यहीं पर पास में छोटी वर्तिका वाले पुष्प भी होते हैं,

जिन्हें गॉल कहा जाता है। गॉल पुष्प बंध्य मादा प्रकार के होते हैं। अंजीर में परागण गॉलवाष्प द्वारा होता है, जो रिसेप्टेकल पर एकत्रित होकर गॉल पुष्पों के बीजाडो के अंदर अंडे देती है।

प्यूपा के बाद लारवा का निर्माण होता है और फिर वाष्प बन जाता है, जो अंजीर से बाहर निकलता है। ऐसा करने से यह नर पुष्प द्वार के समीप ब्रुश हो जाते हैं और अपने शरीर पर परागकण ले लेते हैं।

परागकण सहित जब यह कीट नए अंजीर के अंदर प्रवेश करता है तब यह लंबी वर्तिका वाले मादा पुष्पों को परागित कर देता है और फिर से यह अपने अंडे गॉल पुष्पों में देता है।

ऑर्कीड्स में परागण Pollination in orchids

ऑर्कीड्स पौधों में मधुमक्खियों के द्वारा परागण होता है, इसके पुष्प इस प्रकार से अनुकूलित होते हैं, कि इनके परागकण एक पोलीनिया में पूंजीय होते हैं,

जब पुष्प के परिदलपुंज के लेवेलम पर कीट का ध्यान आकर्षित होता है, तो वह कीट उस पर जाकर बैठ जाता है और अपनी जीभ को स्पर में शहद या मकरंद तक पहुंचाता है।

ऐसा करने के लिए उसे अपना सिर स्टिगमैटिक सतह के विपरीत वर्तिकाग्र के भाग को रोस्टेलम सहित खींचना पड़ता है, ताकि उसे स्थान मिल सके।

इसके फलस्वरूप शीर्ष पर रखी हुई पोलीनिया बाहर आ जाती है और उसका चिपकने वाला पदार्थ परागकण कीट के सिर पर चिपक जाता है।

जब यह कीट दूसरे पुष्प के समीप पहुँचता है, तो इसके सिर पर उपस्थित परागकण पुष्प के वर्तिकाग्र सतह पर चिपक जाते हैं। झुकी हुई चिपकनी पोलीनियम वर्तिकाग्र से टकरा जाती है और परागण हो जाता है।

दोस्तों इस लेख में आपने परागण के उदाहरण (Pollination Example in hindi) पड़े आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

FAQs for pollination





Q.1. परागण किसे कहते हैं?





Ans. परागकण का परागकोष से वर्तिकाग्र तक विभिन्न माध्यमों के द्वारा पहुंचना ही परागण कहलाता है।









Q.2. परागण के दो मुख्य प्रकार कौन से हैं?





Ans. परागण के दो मुख्य प्रकार स्वपरागण और पर परागण होते हैं।









Q.3. कौन सा जानवर सबसे ज्यादा परागण करता है?





Ans. मधुमक्खी ही सबसे ज्यादा परागण करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।







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