हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत Heisenberg's uncertainty principle
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत क्या है महत्व और उदाहरण (Heisenberg's uncertainty principle) में।
दोस्तों इस लेख द्वारा आज आप हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत उसका गणितीय रूप के साथ महत्व और उदाहरण भी जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत क्या है महत्व और उदाहरण:-
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हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत क्या है What is Heisenberg's uncertainty principle
हमारे चारों ओर पर विभिन्न प्रकार के आकाशीय पिंड और उपग्रह घूमते रहते हैं, किंतु इनका घूमने का पथ निश्चित होता है और वह इस पथ का ठीक प्रकार से अनुसरण भी करते हैं, और अपने पद से भ्रमित नहीं होते हैं। यदि किसी भी क्षण किसी पिंड की त्रिविमीय आकाश में स्थिति और उसका वेग पता चल जाए
तो उसके निश्चित पथ का ज्ञान भी हो जाता है, किंतु दूसरी तरफ जैसे कि इलेक्ट्रॉन आदि की तरंग की प्रकृति के कारण उनकी सही स्थिति और संवेग एक साथ अर्थात एक ही समय ठीक-ठीक निर्धारित करना संभव नहीं है, वही अनिश्चितता का सिद्धांत कहलाता है।
साधारण भाषा में कहा जा सकता है, कि एक निश्चित क्षण में किसी निश्चित कण की स्थिति और उसका संवेग एक साथ ज्ञात नहीं किया जा सकता इसको ही हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत कहते हैं।
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत की परिभाषा Definition of Heisenberg's uncertainty principle
किसी भी अति सूक्ष्म कण जैसे कि इलेक्ट्रॉन की स्थिति तथा संवेग को एक ही साथ सही-सही ज्ञात करना संभव होता है, क्योंकि यदि एक को पूरी तरीके से पूरी यथार्थता से ज्ञात कर लिया जाए तो दूसरे का निर्धारण करना असंभव हो जाता है।
हाईजेनवर्ग के अनिश्चितता का सिद्धांत का गणितीय रूप Mathematical Formulation of Heisenberg's Uncertainty Principle
हाईजेनवर्ग के सिद्धांत के आधार पर कहा गया है, कि किसी भी कण का एक ही क्षण अर्थात एक निश्चित समय पर संवेग और उसकी स्थिति दोनों का सही-सही मापन संभव नहीं हो सकता है, इसीलिए हाइजनबर्ग ने स्पष्ट किया है, कि किसी कण की
स्थिति में अनिश्चितता ∆x जबकि संवेग में अनिश्चितता को ∆p का गुणनफल स्थिर होता है, क्योंकि h/4 के समान या अधिक होता है, इसलिए हाईजेनवर्ग के सिद्धांत को गणितीय रूप में निम्न प्रकार से प्रदर्शित किया जा सकता है:-
हाईजेनवर्ग के सिद्धांत को गणितीय रूप
∆x × ∆p ≥ h/4π
या ∆x × m∆v ≥ h/4π
दोनों प्रकार की अनिश्चितताओं के गुणनफल के स्थिर मान से यह स्पष्ट हो जाता है, कि वे एक-दूसरे के साथ व्यूतक्रम अनुपात में संबंधित हैं, इसलिए एक की स्थिति का ज्ञान निश्चित रूप से हो तो जाता है,
किंतु संवेग का ज्ञान ठीक प्रकार से नहीं हो पाता अर्थात संवेग अनिश्चित ही रहता है। साधारण भाषा में हम कह सकते हैं, कि यदि एक का मापन यथार्थ करने की हम कोशिश करेंगे और इसकी अनिश्चितता कम करेंगे तो दूसरे की अनिश्चितता बढ़ जाएगी।
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता के सिद्धांत को ठीक प्रकार से समझने के लिए कक्षा में घूमते हुए एक इलेक्ट्रॉन के संवेग तथा स्थिति की समीक्षा आसानी से की जा सकती है। इस इलेक्ट्रॉन की स्थिति ज्ञात करने के लिए एक ऐसा विशेष प्रकार का सूक्ष्मदर्शी प्रयोग में लाया जाना चाहिए,
जिसमें इलेक्ट्रॉन दिखाई देते हो। कोई भी कण तभी दिखाई देता है जब वह अपनी सतह से प्रकाश का परावर्तन करता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन सबसे छोटा अति सूक्ष्म कण होता है, इसीलिए इसे देखने के लिए कण के आकार के संगत तरंगधैर्य वाला प्रकाश उस पर डालना पड़ता है। इसीलिए इलेक्ट्रोन पर जब ऐसी
किरण या फोटोन को गिराया जाता है, तो उसमें बहुत ऊर्जा होती है तो उसकी टक्कर से इलेक्ट्रॉन का संवेग परिवर्तित होने लगता है और संवेग की अनिश्चितता बढ़ जाती है। अतः इलेक्ट्रॉन की स्थिति को नगण्य अनिश्चितता से ज्ञात किया जा सकता है।
इसी प्रकार इलेक्ट्रान के संवेग को ज्ञात करने के लिए उसकी स्थिति की अनिश्चितता बढ़ानी पड़ती है, ऐसा करने के लिए लंबी तरंगधैर्य वाला विकिरण प्रयोग में लाया जाता है। इससे कहने का अर्थ है, कि निश्चित संवेग से घूमते हुए किसी इलेक्ट्रॉन की स्थिति का सही ज्ञान असंभव ही होता है।
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता के सिद्धांत का महत्व Significance of Heisenberg's Uncertainty Principle
हाइजेनबर्ग के इस सिद्धांत के द्वारा सूक्ष्मदर्शी कणो के लिए अनेकों प्राकृतिक घटनाओं को स्पष्ट किया जा सकता है. इस सिद्धांत के कुछ प्रमुख महत्व को निम्न प्रकार से दिखाया गया है:-
- किसी भी कण के पथ का निर्धारण :- हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार एक ही समय पर किसी कण की निश्चित स्थिति व वेग ज्ञात करना संभव नहीं है अर्थात या असंभव ही है, इसीलिए क्वांटम यांत्रिकी में किसी कण के पद का निर्धारण असंभव है।
- किसी कण के कोणीय संवेग का निर्धारण :- कण का कोणीय संवेग स्थिति एवं संवेग एक सदिश गुणनफल होते हैं, क्योंकि अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार एक ही क्षण कण की स्थिति एवं संवेग सुनिश्चित नहीं है। अतः कण का कोणीय संवेग निर्धारण करना बिल्कुल संभव नहीं है।
- परमाणु आमाप निर्धारण :- इस सिद्धांत के आधार पर परमाणु का आमाप का अनुमान लगाया जा सकता है।
- नाभिक के अंदर इलेक्ट्रॉनों का अस्तित्व :- इस सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के अंदर नहीं रह सकता अतः बीटा क्षय से पूर्व इलेक्ट्रॉन नाभिक के अंदर नहीं होते हैं।
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत का उदाहरण Example of Heisenberg's Uncertainty Principle
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत के द्वारा एक 9.11×10-28 kg द्रव्यमान वाली वस्तु की स्थिति और वेग में अनिश्चितता के गुणनफल का मान बताइये:-
सिद्धांत के अनुसार :-
∆x × ∆p ≥ h/4π
∆x × m∆v ≥ h/4π
∆x × ∆v = 6.626×10-34 / 4×3.1416×9.11×10-28
= 5.8×10-8 Ans.
दोस्तों यहाँ पर आपने हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत क्या है महत्व और उदाहरण (Heisenberg's uncertainty principle) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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