पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति Structure and nature of matter

पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति Structure and nature of matter

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति (Structure and nature of matter) में।

दोस्तों यहाँ पर आप पदार्थ की संरचना, प्रकृति के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण तथ्यों को जान पायेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख और पढ़ते है, पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति के बारे में:-

पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति


पदार्थ या द्रव्य किसे कहते हैं what is a matter 

हम अपने आस पास जितनी भी वस्तुओं को देखते हैं जितनी भी वस्तुओं को छूते हैं, उनको महसूस करते हैं, उन सभी को हम द्रव्य या पदार्थ (Matter) कहते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो कोई भी ऐसी वस्तु जिसमें द्रव्यमान होता है, वह स्थान घेरती है और इंद्रियों के द्वारा हम उसको महसूस कर सकते हैं,

वह द्रव्य या पदार्थ कही जा सकती है। वास्तव में यह संपूर्ण ब्रह्मांड द्रव्य या पदार्थ से मिलकर बना हुआ है और यह हमें विभिन्न प्रकार से घेरे हुए भी है, जैसे कि वृक्ष हमें घेरते हैं, घर, जल, हवा, जीव-जंतु, ब्रह्मांड के हर एक कण जिस तरह हमें घेरते है उन सबका अनुभव हम अपनी इंद्रियों के द्वारा देखकर,

छूकर, सुनकर और स्वाद आदि से भी सकते हैं, इसलिए इन सभी वस्तुओं को ही हम पदार्थ कहते हैं, क्योंकि इनमें द्रव्यमान होता है और यह विभिन्न आकृतियों आकार और रंग रूप के होते हैं तथा जिन्हें हम महसूस भी कर सकते हैं, देखकर, छूकर और स्वाद के द्वारा भी इनका हम पता लगा सकते हैं, इसलिए इनको हम पदार्थ या द्रव्य कह सकते हैं।


पदार्थ या द्रव्य का वर्गीकरण Classification of matter

द्रव्य या पदार्थ को दो प्रकार से वर्गीकृत किया गया है:- 

  • भौतिक वर्गीकरण Physical classification

पदार्थ की भौतिक अवस्थाओं के आधार पर पदार्थ को तीन भागों में बांटा गया है, जिसमें ठोस द्रव और गैस होते हैं। द्रव्य की तीनों प्रकार की अवस्थाएँ उन पदार्थों के अंतराअणुक बलों अंतरा अणुक रिक्तियों पर निर्भर करती है, जबकि विभिन्न प्रकार के द्रव्यों के अणुओं की पैकिंग पर भी निर्भर करती है।

  1. ठोस (Solid) :- वे पदार्थ होते हैं, जिनके कण निश्चित क्रम में और आपस में बिल्कुल पास पास में विन्यासित होते हैं, इसलिए इन कणों के मध्य गति बहुत ही कम हो पाती है अर्थात ना के बराबर हो पाती है और यह कण स्वतंत्र नहीं होते हैं, इसीलिए इनके आकार और आयतन हमेशा निश्चित ही रहते हैं।
  2. द्रव (Liquid) :- यह वे पदार्थ है, जिनके अवयवी कणो के मध्य में अंतरा अणुक बल कम होता है, जिससे उनके अणु कम पास-पास में होते है अर्थात उनके अणु ठोसों के अणुओ की तुलना में दूर होते है, इसलिए वे थोड़े बहुत अपने आसपास गति कर सकते हैं, घूम सकते हैं, इसकारण इनके आयतन तो निश्चित होते हैं, किंतु आकृति निश्चित नहीं होते और ऐसे द्रव्य को हम द्रव कहते हैं, जिनमें  तरलता का गुण अवश्य पाया जाता है।
  3. गैस (Gas) :- द्रव्य की तीसरी व्यवस्था जिसे हम गैस कहते हैं, इनमें अवयवी कणों के मध्य दूरी अधिक-अधिक होती है, अर्थात इनके कणो के मध्य दूरी ठोस और द्रव के कणो के मध्य दूरी की तुलना में सबसे आधिक होती है, इसलिए यह आसानी से मुक्त गति करने में सक्षम होते हैं, किन्तु इनका आकार और आयतन दोनों ही अनिश्चित होते हैं।

  • रासायनिक वर्गीकरण Chemical classification

रासायनिक वर्गीकरण के आधार पर सभी प्रकार के द्रव्यों को समांगी और विषमांगी पदार्थों के रूप में बांटा गया है जिन्हें हम निम्न प्रकार से आसानी से समझ सकते हैं:- 

  1. समांगी पदार्थ (Homogeneous substance) :- समांगी पदार्थ वे होते हैं, जिनका संगठन और गुण सभी प्रवस्था में पूरी तरह से समरूप होता है। ऐसे पदार्थों के कण को हम सूक्ष्मदर्शी (Microscopes) के द्वारा भी नहीं देख सकते, इसीलिए उनको समांगी पदार्थ के रूप में जाना जाता है। उदाहरण स्वरूप हम तत्व (Element) और यौगिक (Compound) को समांगी पदार्थ के रूप में जानते हैं।
  2. विषमांगी पदार्थ (Heterogeneous matter) :- विषमांगी पदार्थ वे होते हैं, जिनका संगठन समान रूप से संपूर्ण भाग में वितरित नहीं होता है, ऐसे पदार्थों में दो या दो से अधिक प्रावस्थाएँ देखने को मिल जाती हैं। विषमांगी मिश्रण के अवयवों को बिना सूक्ष्मदर्शी के अर्थात नग्न आंखों से आसानी से देख सकते हैं। उदाहरण के लिए नमक (Salt) और शक्कर (Suger) का मिश्रण लोहा (Iron) सल्फर (Sulfer) और नमक (Salt) का मिश्रण आदि विषमांगी पदार्थों के उदाहरण है।

द्रव्य को रासायनिक रूप से पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और जब पदार्थ में केवल एक ही अवयव उपस्थित होता है, तो उसको हम शुद्ध पदार्थ कहते हैं, किंतु जब स्थिति इसके विपरीत होती हैं अर्थात पदार्थ में एक से अधिक अवयव उपस्थित होते हैं, तो उसको अशुद्ध पदार्थ या फिर उसको मिश्रण (Mixture) के नाम से जाना जाता है, जिन्हे निम्न प्रकार समझते है:-


शुद्ध पदार्थ Pure Substance

शुद्ध पदार्थ क्या है :- शुद्ध पदार्थ वे सभी पदार्थ होते हैं, जिनमें केवल एक ही प्रकार के अवयव एक ही प्रकार के गुणधर्म के अवयव उपस्थित होते है, अर्थात वे पदार्थ जो एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बने हो उनको हम शुद्ध पदार्थ (Pure Substance) कह सकते हैं।

शुद्ध पदार्थ का संगठन हमेशा निश्चित होता है या फिर कह सकते हैं, कि उनका संगठन स्थिर रहता है। शुद्ध पदार्थों को उनके अवयवों में साधारण भौतिक विधियों से कभी भी अलग नहीं किया जा सकता, जबकि शुद्ध पदार्थ के सभी गुण शुद्ध पदार्थ के संगठन पर ही निर्भर नहीं करते यह उसकी प्रकृति पर भी निर्भर करते हैं।

  • शुद्ध पदार्थ का वर्गीकरण Classification of pure substances

शुद्ध पदार्थ को तत्वों और यौगिकों में निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है:- 

  • तत्व Element 

तत्व किसी भी पदार्थ का सबसे सरलतम सबसे छोटा रूप होता है और हम साधारण भाषा में यह भी कह सकते हैं, कि तत्व किसी भी पदार्थ का सबसे सरल रूप है,  क्योंकि इसे और अपघटित नहीं किया जा सकता अर्थात इसको और सरल पदार्थ या छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं तोड़ा जा सकता है।

साधारण भाषा में हम कह सकते हैं, कि वे सभी पदार्थ जिनमें केवल एक ही प्रकार के अणु (Molecule) विद्यमान होते हैं, उनको हम तत्व कहते हैं। तत्व हमेशा शुद्ध और सरल पदार्थ होता है, जबकि इसमें एक ही प्रकार के अणु और परमाणु पाए जाते हैं इसलिए तत्वों को किसी भी प्रकार की रासायनिक विधियों या भौतिक विधियों के द्वारा सरल पदार्थों में कभी भी अपघटित नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए तांबा (cu) लोहा (fe) हाइड्रोजन (H2) आदि को तत्व कहा जाता है।

  • तत्वों का वर्गीकरण Classification of elements

तत्वों के गुणों के आधार पर विशेषज्ञों ने इनको निम्न तीन प्रकार से वर्गीकृत किया है:- 

  1. धातु तत्व (Metal element) :- वे सभी तत्व जो ऊष्मा और विद्युत के सुचालक (Conductor) होते हैं, अर्थात इनमें से ऊष्मा और विद्युत एक सिरे से दूसरे सिरे पर आसानी से पहुँच जाती है, जो इनमें पाए जाने वाले फ्री इलेक्ट्रॉन (Free Electron) के कारण होती है इसलिए इनको धातु तत्व कहा जाता है। वहीं दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं, कि वे तत्व जो विधुत और ऊष्मा के सुचालक हैं, सामान्य ताप पर ठोस अवस्था में मिलते हैं और आघातधर्य और तन्यता जैसे गुण भी प्रदर्शित करते हैं, उनको हम धातु तत्व के नाम से जानते हैं, जैसे कि सोना (Au) चांदी (Ag) लोहा (fe) एलमुनियम (Al) आदि।
  2. अधातु तत्व (Non-metallic elements) :- अधातु तत्व के अंतर्गत उन सभी तत्वों को वर्गीकृत किया गया है, जो ऊष्मा और विद्युत के कुचालक होते हैं और यह अवस्था उनमें फ्री इलेक्ट्रॉन ना होने के कारण उत्पन्न हो जाती है। साधारण भाषा में हम कह सकते हैं, कि मेंडलीफ की आवर्त सारणी के पी ब्लॉक के वे तत्व जो ठोस द्रव गैस तीनों अवस्था में होते हैं तथा धातु और उपधातु के गुण प्रदर्शित नहीं करते उनको हम अधातु तत्व कहते हैं। उदाहरण के लिए नाइट्रोजन (N2) ऑक्सीजन (O2) सल्फर (S) आदि।
  3. उपधातु तत्व (Metalloid elements) :- उपधातु तत्व वे तत्व होते हैं, जिनमें धातु और अधातु दोनों के थोड़े-थोड़े गुण पाए जाते हैं। और यह उपधातु तत्व मेंडलीफ की आवर्त सारणी में पी ब्लॉक में देखने को मिल जाते हैं, जिनकी संख्या बहुत ही कम होती है और इनका उपयोग भी कई प्रकार से होता है। उदाहरण के लिए बोरान,सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एण्टीमनी और टेल्युरियम  को हम उपधातु तत्व के नाम से जानते हैं।

  • यौगिक Compound 

यौगिक वे पदार्थ होते हैं, जो हमेशा शुद्ध रूप में तो पाए जाते हैं, किंतु यह दो या दो से अधिक सरल पदार्थों से मिलकर बने होते हैं और रासायनिक विधियों के द्वारा अपने अवयवों सरल पदार्थों में अपघटित भी हो जाते हैं। साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि एक से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में संगठित पदार्थों को ही यौगिक कहा जाता है, जैसे कि सोडियम क्लोराइड (Nacl) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) आदि।

  • यौगिकों की विशेषताएँ Characteristics of compounds

  1. यौगिक हमेशा दो या दो से अधिक तत्वों के रासायनिक संयोग से मिलकर बनते हैं, और हमेशा ही समांगी मिश्रण भी होते हैं।
  2. यौगिक में उपस्थित तत्वों के कण या अणु एक निश्चित अनुपात में होते है, जबकि जो यौगिक के गुण होते हैं, उस यौगिक में उपस्थित तत्वों के गुणों से बिल्कुल भिन्न-भिन्न होते हैं।
  3. यौगिक के अंतर्गत जो भी सरल तत्व आते हैं, उनको-उनके अवयवी कणों में साधारण भौतिक विधियों के द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता।
  4. रासायनिक यौगिक के बनने पर ऊष्मा, प्रकाश अथवा विद्युत के रूप में ऊर्जा उत्पन्न या अवशोषित होती है।

  • यौगिकों के प्रकार Type of compound 

कार्बन की उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर यौगिकों को निम्न दो प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:- 

  1. कार्बनिक यौगिक (Organic Compound):- कार्बनिक योगिक वे योगिक होते हैं, जिनमें हमेशा ही कार्बन उपस्थित होता है। कार्बनिक यौगिक संसार में सबसे अधिक पाए जाने वाले यौगिक हैं, क्योंकि कार्बन की संयोजकता +4 और -4 होती है, इसलिए यह विभिन्न प्रकार के यौगिकों का निर्माण कर देते हैं, इसप्रकार के यौगिक जंतुओं और पौधों से प्राप्त होते हैं, कार्बोहाइड्रेट, हारमोंस, विटामिन, मॉम, प्रोटीन, तेल, वसा आदि को कार्बनिक योगिक के अंतर्गत रखा गया है, क्योंकि इन सभी में कार्बन उपस्थित होता है।
  2. अकार्बनिक यौगिक (Inorganic Compound) :-  अकार्बनिक यौगिक के नाम से ही पता चल रहा है, कि वे सभी यौगिक जिनमें कार्बन अनुपस्थित होता है, उनको अकार्बनिक यौगिक कहा जाता है और यह चट्टानों और खनिजों से अधिक प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए धातुऐं और उनके सभी प्रकार के यौगिक मार्बल, जिप्सम, वॉशिंग सोड़ा, आदि को हम अकार्बनिक यौगिक के नाम से जान सकते हैं। 

दोस्तों आपने इस लेख में पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति (Structure and nature of matter) के बारे में पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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  1. पारा धातु है या अधातु Mercury is Metal or Non -Metal
  2. उपधातु क्या है महत्व What is Metalloid
  3. सीसा क्या है यौगिक उपयोग रासायनिक सूत्र what is lead

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