अलैंगिक जनन किसे कहते हैं इसकी विधियाँ what is Asexual reproduction its Methods
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है इस लेख अलैंगिक जनन किसे कहते हैं प्रकार (what is asexual reproduction methods) में।
दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप अलैंगिक जनन किसे कहते हैं, अलैंगिक जनन की विधियाँ आदि के बारे में जानेंगे, तो आइये शुरू करते है यह लेख अलैंगिक जनन किसे कहते हैं विधियाँ:-
अलैंगिक जनन किसे कहते हैं what is asexual reproduction
संसार में सभी प्राणी अपनी जाति की वृद्धि और विकास के लिए तथा अपने वंश को संचालित करने के लिए जनन करते हैं अर्थात वे अपनी ही जैसी संतति को उत्पन्न करते हैं, जिनमें नर तथा मादा भाग लेते हैं,
तथा वह युग्मकों का निर्माण करते हैं, और संलयन करके नई संततियों को उत्पन्न करते है, किंतु कुछ ऐसी परिस्थितियाँ कुछ ऐसे जंतु भी होते हैं,
जिनमें जनन केवल एक ही जीव के द्वारा होता है, अर्थात कह सकते हैं, कि एक ही जीव के द्वारा अपने समान संतति को जन्म देना अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) कहलाता है।
साधारण शब्दों में कहें कि अलैंगिक जनन वह होता है, जब केवल एक जनक भाग लेकर अपने समान संततियों का निर्माण करता है और यह संतति आनुवंशिक दृष्टि से अपने जनक के बिल्कुल समान होती है,
अर्थात कह सकते हैं, कि एक जनक से प्राप्त समरूप संस्तुतियों को क्लोन (Clone) और क्लोन के प्रत्येक सदस्य को रेमिट कहते हैं।
अलैंगिक जनन विभिन्न पौधों और अकशेरुकी जंतुओं में अधिकतर देखने को मिलता है जिनकी कुछ विधियाँ निम्न प्रकार से हैं:-
अलैंगिक जनन की विधियाँ Methods of Asexual reproduction
विखंडन Fission
अलैंगिक जनन की विखंडन प्रक्रिया द्वारा जनन एक कोशिकीय जैसे कि जीवाणुओं और प्रोटोजोआ (Protozoa) में सबसे अधिक देखने को मिलता है।
इस विधि में जनक का शरीर लगभग दो समान भागों में या कई भागों में बंट जाता है अर्थात एक भाग से दो भाग बन जाते हैं या कई भाग निर्मित हो जाते है
और यह प्रत्येक भाग फिर से वृद्धि और विकास करता है, परिपक्व होकर व्यस्क होकर फिर से दो भागो में या अधिक भागो में विभाजित हो जाता है, इस प्रकार से विखंडन की क्रिया होती है।
विखंडन दो प्रकार का होता है
द्विखंडन :- द्विखंडन (Binary fission) की विधि में जनक का शरीर समसूत्री विभाजन द्वारा दो समान संततियों में बंट जाता है,
जिसमें केंद्रीकीय विभाजन अर्थात कैरियोकाइनेसिस (Karyokinesis) के पश्चात कोशिकाद्रव का विभाजन अर्थात साइटोकाइनेसिस (Cytokinesis)
होता और एक जीव दो समान भागो अर्थात पुत्री कोशिका में बादल जात है। द्विखंडन कोशिकाद्रव्य के विभाजन के तल के आधार पर भी भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे कि अनियमित द्विखंडन, अनुप्रस्थ द्विखंडन, अनुलम्ब, त्रियक द्विखंडन आदि।
उदाहरण :- प्लेनेरिया में अनुप्रस्थ द्विखंडन देखने को मिलता है। प्लेनेरिया में यह विखंडन ग्रसनी के पीछे एक संकीर्णन से शुरू होता है, जो धीरे-धीरे गहरा होता जाता है और अंत में दो जंतुओं में बंट जाता है।
इसके बाद उनमें अंगों का विकास होता है। इस प्रकार से संतति का आधा भाग नया होता है, और आधा भाग जनक का होता है।
बहुखंडन :- बहुखंडन (Multiple fission) वह अलैंगिक जनन प्रकार की विधि है, जिसमें एक ही कोशिका से अनेक कोशिकाओं का निर्माण हो जाता है।
इस प्रक्रिया में सबसे पहले कोशिका के अंदर का केंद्रक बार-बार विभाजित होकर कई संतति केंद्रक में परिवर्तित हो जाता है, इसके बाद धीरे-धीरे से कोशिका द्रव्य भी जितने संतति केंद्रक हैं उतनी संख्या में विभाजित होकर अलग-अलग बंट जाता है।
इस प्रकार से बहुखंडन हो जाता है और एक कोशिका से अनेक कोशिकाओं का निर्माण हो जाता है। स्पोरोजोआ, फ़ौरेमिनीफेरा में यह बहुखंडन देखने को मिलता है।
प्लाज्मोटोमी Plasmotomy
अलैंगिक जनन की यह भी एक प्रमुख विधि है, जो प्रमुख रूप से ओलेपाइना पीलोमिक्सा, जैसे बहूकेंद्रकीय प्रोटोजोआ में देखने को मिलती है।
इस विधि में जनक कोशिका का शरीर दो या दो से अधिक छोटे-छोटे आकार के बहुकेंद्रिकीय संततियों में विभक्त हो जाता है। इसके पश्चात वे वृद्धि करते हैं और सामान्य आकार ग्रहण कर लेते हैं।
मुकुलन Budding
अलैंगिक जनन की यह विधि भी कुछ प्रोटोजोआ जैसे कि वार्टिसेला, एफीलोटा में देखने को मिलती है। इन जंतुओ में जनक के शरीर में एक या एक से अधिक मुकुलनों के द्वारा अनियमित विखंडन होता है,
जिससे वह छोटे - छोटे संततियों में बंट जाता है। इसके बाद जनक से वह पृथक होकर वृद्धि, विकास करते है तथा वयस्क में परिवर्तित हो जाते है। मुकुलन दो प्रकार का होता है, बहिर्जात मुकुलन और अंतर्जात मुकुलन
बीजाणुजनन Sporulation
बीजाणु बहुत ही छोटी एक कोशिकीय अलैंगिक जनन संरचनाएँ होती है, जो जीवाणु कवकों शैवालों और प्रोटिस्टा आदि में पाए जाते है, तथा जनक शरीर से अलग हो जाती हैं
और वृद्धि तथा विकास करके नये जीव को जन्म दे देती है। बीजाणु अनेक प्रकार के होते है, जैसे चलजीवाणु, अचलजीवाणु, कोनिड़िया, ओइडिया, क्लेमाइड़ोबीजाणु, आदि।
संविभजन Fragmentation
अलैंगिक जनन की यह विधि ब्रायोफाइट्स शैवालों कवको में देखने को मिलती है, जबकि स्पंजों प्लेटीहेलमाइंथेस, इकाईनोडर्मेटा में भी यह विधि पाई जाती है। एक विधि के द्वारा जनक
का शरीर किसी भी कारण से दो या दो से अनेक खंडों में विभक्त हो जाता है। इसके पश्चात प्रत्येक खंड वृद्धि और विकास करके नई संतति बन जाता है।
पुनरुदभवन Regeneration
जीव जंतुओं की वह क्षमता, जिसके कारण वे अपने खोए हुए अंगों का वृद्धि द्वारा अथवा कायिक कोशिकाओं के पुनर्निर्माण द्वारा प्रतिस्थापन करते है, उसे पुनरुदभवन कहा जाता है, जिसकी सबसे पहले खोज 1740 में ट्रेंम्बले ने हाइड्रा में की थी।
कायिक जनन Vegetative Reproduction
निम्न और उच्च श्रेणी के पादपों में पादप के किसी भी का एक भाग से उसका पुनर्जन्म की एक सामान्य प्रक्रिया होती है, जिसके अंतर्गत पौधे के किसी एक कायिक भाग को मातृ पादप से अलग कर दिया जाता है
और उस अलग किये हुए भाग से नया पौधा तैयार किया जाता है। जड़, तना, पत्ती और कलिकाओं जैसे अंग विभिन्न प्रकार से रूपांतरित होकर
पादपों के कायिक जनन में भाग लेते हैं। इस विधि से प्राप्त पादपों का जीवद्रव्यक मातृ पौधे के जीवद्रव्यक से किसी भी प्रकार भिन्न नहीं होता है।
दोस्तों यहाँ पर आपने अलैंगिक जनन किसे कहते हैं अलैंगिक की विधियाँ (what is Asexual reproduction) आदि तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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