मुर्गियों में होने वाले रोग और उपचार Diseases of chickens

मुर्गियों में होने वाले रोग और उपचार Diseases of chickens

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है इस लेख मुर्गियों में होने वाले रोग और उपचार (Chicken diseases and treatment) में।

दोस्तों इस लेख के द्वारा आप मुर्गियों में होने वाली बीमारियों और उनका उपचार, रोकथाम के बारे पड़ेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख मुर्गियों की बीमारियाँ और उपचार:-

एचआईवी एड्स के कारण लक्षण और रोकथाम

मुर्गियों में होने वाले रोग और उपचार

मुर्गी में होने वाले रोग Diseases of chickens

मुर्गी पालन में यह जानना बहुत जरूरी होता है, कि मुर्गियों में कौन-कौन सी बीमारी होती है? क्योंकि मुर्गी पालन में कई प्रकार की बीमारियाँ मुर्गी

फार्मो में फैल जाती है, जिससे मुर्गी पालन में उनके उत्पादन पर भारी असर देखने को मिलता है। मुर्गियों में होने वाली कुछ प्रमुख बीमारियाँ निम्न प्रकार से हैं:-

मुर्गियों में होने वाले रोग और उपचार

रानीखेत या न्यू कैसेल रोग Ranikhet or New Cassel disease

रानीखेत बीमारी मुर्गियों में सबसे प्रमुख बीमारी होती है, जो एक विषाणु जनित बीमारी होता है। यह बीमारी इतनी घातक विनाशकारी होती है, कि इसमें मुर्गियों की 100% मृत्यु की संभावना रहती है।

रानीखेत बीमारी या रोग दूषित वायु, दूषित भोजन के माध्यम से फैलने वाला रोग है। इसके अलावा यह रोगग्रस्त पक्षी की नासिका और मुख से निकलने वाले श्राव के माध्यम से भी अन्य पक्षियों में

फैलने वाला रोग होता है। यह एक ऐसा रोग है, जो सभी आयु वर्ग के पक्षियों में देखने को मिल जाता है। जब पक्षी या मुर्गियाँ रानीखेत नामक बीमारी से ग्रसित होते हैं, तो कई प्रकार के लक्षण देखने को मिलते हैं,

जैसे कि पक्षियों में सबसे पहले स्वसन तंत्र प्रभावित होने लगता है और पक्षी को कफ के साथ ही स्वसन क्रिया तथा सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

इसके 2 से 3 दिन के पश्चात तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित होने लगता है और पक्षियों में सिर गर्दन और शरीर में कंपन देखने को मिलता है,

जबकि कुछ पक्षी आंशिक और पूर्ण रूप से लकवाग्रस्त भी हो जाते हैं। कभी-कभी पक्षी गोल दायरे में दौड़ने लगता है और कलाबाजी भी करने लगता है।

रानीखेत को रोकने के उपाय Measures to stop Ranikhet

इस रोग को रोकने के लिए सबसे अच्छा उपचार वैक्सीन देना या टीका लगवाना होता है, जिसके टीकें को एफ/बी-1 जो 4 से 6 दिन की आयु पर जबकि आर 2 बी या आर डी कोल्ड वैक्सीन 60 दिन की आयु पर देते है, इससे पक्षी में रोगरोधिता बनी रहती है।

रानीखेत रोग का कोई भी प्रभावी उपचार अभी तक नहीं है, फिर भी रोग से ग्रसित पक्षी का पुनः टीकाकरण (Re Vaccination) करके उनके शरीर में प्रतिजैविकों की संख्या में वृद्धि की जा सकती है और इस प्रकार से इस रोग से निपटा जा सकता है।

कुक्कुट चेचक Poultry Pox

कुक्कूट चेचक भी पक्षियों में फैलने वाला एक विषाणु जनित रोग है, इसका विषाणु आकार में बहुत बड़ा होता है और शुष्कन प्रतिरोधी भी होता है, क्योंकि इस विषाणु को ठीक प्रकार से सुखा भी देते हैं

तो यह लगभग 10 साल तक संक्रमण करने में सक्षम रहता है। यह रोग पक्षियों में घाव और खारोंचो के माध्यम से कीटों के माध्यम से फैलने वाला रोग है, जो सभी आयु वर्ग के पक्षियों में देखने को मिलता है।

कुक्कुट चेचक के प्रकार Type of Poultry Pox

कुक्कुट चेचक (Poultry Pox) नामक रोग निम्न तीन प्रकार का होता है:-

  1. त्वचा की चेचक :- त्वचा का चेचक नामक रोग पक्षियों की त्वचा पर होता है। इस रोग में पक्षियों की कलगी गलचर्म और चेहरे पर दाने देखने को मिलते हैं, जबकि उनमें खुरंट भी निकल आते हैं।
  2. मुख की चेचक :- यह चेचक रोग पक्षियों के मुख में होता है, इसीलिए इसे मुख की चेचक नामक रोग के नाम से जानते हैं। इस रोग में ग्रसिका तक की श्लेषम झिल्लीयाँ प्रभावित होने लगती हैं।
  3. नासिका चेचक :- नासिका चेचक रोग नाक और नेत्रों के एरिया को प्रभावित करता है। यह मुख और नासिका चेचक को गीली या डिप्थीरिया चेचक भी कहते हैं।

कुक्कुट चेचक रोग का प्रभाव 1 से 2 सप्ताह के बीच में रहता है और मुख पर नासिका चेचक में पक्षी की डिप्थीरिटिक झिल्ली बन जाने से पक्षी अंधा हो जाता है, जबकि त्वचा चेचक में इतना कोई खतरा नहीं रहता है, इस चेचक के कारण लगभग 20% तक पक्षियों की मृत्यु होती है।

कुक्कुट चेचक का उपचार Poultry Pox Treatment

कुक्कुट चेचक के उपचार के लिए और इस रोग के रोकथाम के लिए चूजों का टीकाकरण फाउल पॉक्स टीका देना बहुत ही आवश्यक होता है।

अंडे देने की अवस्था में एक से दो बार टीकाकरण देना उचित रहता है। जब रोग हो जाता है, तो इसका कोई प्रभावी उपचार नहीं किया जा सकता।

पुलोरम रोग Pullorum disease

पुलोरम नामक रोग प्रमुख रूप से छोटे-छोटे चूजों को प्रभावित करने वाला रोग होता है, जो साल्मोनेला पुलोरम नामक जीवाणु के संक्रमण के फलस्वरूप फैलता है।, जबकि यह रोग मुर्गियों के

अंडाशय को प्रभावित करता है। यह रोग अंडों के माध्यम से संचरित होने वाला रोग है। अंडजोत्पत्ति के समय स्वस्थ चूजे संक्रमित चीजों के संपर्क में आते है तो वे इस रोग से संक्रमित हो जाते हैं।

अंडजोत्पत्ति के पश्चात जब चूजे निकलते हैं, तो वह मुरझाए होते हैं और उनमें पंखों की व्यवस्था अव्यवस्थित होती है, इन सब चूजों को कई प्रकार की तकलीफ देखने को मिलती है,

जैसे कि यह सांस लेने में दिक्कत होती है और यह किसी कोने में अपने आप को समेट लेते हैं। इस रोग में पहले सफेद दस्त देखने को मिलते हैं और शक्तिहीनता, उदासीनता, कलगी का पीलापन आदि लक्षण भी दिखाई देते हैं।

पुलोरम रोग से बचाव Pullorum disease prevention

इस रोग से बचने का अभी तक कोई भी उपचार नहीं है, किंतु संक्रमित वयस्क पक्षियों को खाने में लगभग 10 दिन तक 0.04 प्रतिशत फयूराजोलिडॉन देने से लाभ हो सकता है।

कॉक्सीडियोंसिस Coccidiosis

पक्षियों की आहारनाल को संक्रमित करने वाला यह रोग दूषित जल और भोजन के माध्यम से फैलने वाला होता है। इस रोग का प्रमुख कारक आईमेरिया वंश के कोक्सीडियन प्रोटोजोआ होता है।

इस रोग में पक्षी का चेहरा पीला पड़ जाता है, रक्त की कमी हो जाती है, पंख मुरझा जाते हैं, उनके पंख लटक जाते हैं और अंत में पक्षी की मृत्यु भी हो जाती है। इस रोग की रोकथाम के लिए सल्फर ओषधियों का उपयोग किया जाता है।

बर्ड फ्लू Bird flu

यह पक्षियों में फैलने वाला एक घातक विषाणु जनित रोग होता है, जो विषाणु H5N1 के द्वारा फैलता है। यह कुक्कुट में एक महामारी के रूप में देखने को मिलता है।

इसके अतिरिक्त यह रोग अन्य जंतुओं जैसे बिल्ली, चूहा यहाँ तक कि मनुष्य को भी प्रभावित करता है। इस रोग का अभी तक कोई भी उपचार संभव नहीं हुआ है।

दोस्तों इस लेख में आपने मुर्गियों में होने वाले रोग और उपचार (Diseases of chickens) के बारे में पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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