तुलसी का वानस्पतिक नाम और कुल Botanical name of Tulsi

तुलसी का वानस्पतिक नाम और कुल Botanical name of Tulsi 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख तुलसी का वानस्पतिक नाम और कुल (Botanical name and family of Tulsi) में।

दोस्तों इस लेख में आप तुलसी का वानस्पतिक नाम तुलसी का कुल और औषधीय महत्व जानेंगे। तो आइये शुरू करते है यह लेख तुलसी का वानस्पतिक नाम और कुल:-

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तुलसी का वानस्पतिक नाम और कुल

तुलसी का पौधा क्या है what is tulsi plant 

तुलसी का पौधा पादप जगत के अंतर्गत आने वाला एक द्विबीजपत्री पौधा है, जो अपने गुण के कारण भारतीय संस्कृति तथा आयुर्वेद में एक खास महत्त्व रखता है।

हिन्दु धर्म के कई पुराणों वेदों में इसकी महिमा का बखान किया गया है, इसलिए अपने गुणों विशेषताओं के कारण यह आयुर्वेद, होम्योपैथिक, एलोपैथिक, यूनानी दवाओं में उपयोग लायी जाती है।

तुलसी का पौधा भारत तथा भारत के पडोसी देशों में झाड़ी के रूप में उगता है, किन्तु भारत में इसे सबसे अधिक महत्व प्राप्त है

प्राचीनकाल में भारत के प्रत्येक घर में तुलसी का पौधा हुआ करता था, जो 2-3 फुट तक लम्बा होता है, तथा इसकी पत्तियाँ, एक से दो इंच लंबी तथा सुगन्धित होती है।

तुलसी का वानस्पतिक नाम और कुल

तुलसी का वनस्पतिक नाम और कुल Botanical name and family of Tulsi

तुलसी भारतीय संस्कृति का सबसे धार्मिक पौधा है, जिसे घर - घर में रखा जाता है। तुलसी का वानस्पतिक नाम, तुलसी का वैज्ञानिक नाम तुलसी का द्वीपद नाम ऑसीमम सेक्टम (Ocimum sanctum) होता है

जबकि यह लेमिएसी (लेबियेटी) (Lemiaceae (labiatae) कुल से संबंध रखती है। इसकी अन्य कई जातियाँ है, किन्तु ऑसीमम सैक्टम सबसे प्रमुख है जिसकी दो प्रजातियाँ होती है, श्रीतुलसी और कृष्ण तुलसी।

तुलसी का औषधीय महत्व Medicinal importance of tulsi 

भारतीय हिन्दु धर्म में तुलसी को पवित्र और पूज्यनीय पौधा माना गया है, इसके साथ तुलसी के फायदे तुलसी कई औषधीय गुण भी रखता है। तुलसी के पौधे के औषधी महत्व को देखते हुए इसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी आदि जगह उपयोग में लाया जाता है।

यह भारतीय संस्कृति में हिंदू धर्म का एक सबसे पवित्र पौधा माना जाता है, इसीलिए इसे घरों में मंदिरों में सम्मानीय स्थान प्राप्त होता है।

धार्मिक विचारों वाली नित्य पूजा पाठ करने वाली स्त्रियाँ इसके पौधे पर नित्य जल चढ़ाते हैं, तथा प्रार्थना करती है और शाम के समय भी पूजा करती हैं।

धार्मिक अनुष्ठान में पूजा में चरणामृत बनाने में तुलसी की पत्तियों का विशेष महत्व होता है। इसकी पत्तियों का उपयोग बुखार खांसी, सर्दी तथा ब्रोंकाइटिस साँस सम्बंधित रोगों के उपचार में भी होता है,

कियोकि इनकी पत्तियों में विटामिन सी मिनरल्स, आयरन, जिंक, के साथ कई अम्ल जैसे सिट्रिक, मैलिक और टारट्रिक पाए जाते है, जो कई शारीरिक विकारों को दूर करने में लाभदायक होते है।

राम तुलसी की पत्तियों एवं पौधे में बहुत तेज सुगंध आती है अतः इसे गर्म पानी में उबालकर स्नान करने से गठिया लकवा, त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं।

पत्तियों को चबाचबाकर खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जबकि इसके बीजों को पीसकर सिर पर बांधने से सिर दर्द ठीक हो जाता है,

और पत्तियों को फिटकरी के साथ चोट वाले स्थान पर लगाने से आराम मिलता है। इसकी अन्य जाति ऑसीमाम बेसिलिकम के पौधे के विभिन्न भाग बहुत और भी महत्व के होते हैं।

दोस्तों आपने यहाँ पर तुलसी का वानस्पतिक नाम और कुल (Botanical name and family of tulsi) के साथ अन्य तथ्यों को पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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