शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार Types of supervision in education

शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार

शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार Types of supervision in education

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार (Types of supervision in education) में।

दोस्तों यहाँ पर आप बीएड के प्रमुख टॉपिक शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार क्या है जानेंगे, तो आइये शुरू करते है शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार:-

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शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार Types of supervision in education

पर्यवेक्षण का उद्देश्य और उसका दर्शन अनेक परिवर्तनों के फलस्वरूप निकला है। अपने आरंभिक अवस्था में पर्यवेक्षण निरीक्षण तक सीमित था किंतु विकास क्रम के आधार पर पर्यवेक्षण के निम्न प्रकार होते हैं:-

सुधारात्मक पर्यवेक्षण

सुधारात्मक पर्यवेक्षण वह पर्यवेक्षण होता है, जिसमें शिक्षकों के दोषों को खोजा जाता है। इस पर्यवेक्षण में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की कमियाँ, शिक्षण अधिगम में आने वाली अनियमितताओं का पता लगाया जाता है।

किंतु यह किसी सकारात्मक दृष्टि से नहीं होता पर्यवेक्षक अधिकारी या प्रधानाचार्य को संबंधित अध्यापकों की रिपोर्ट या सूचना मिलती है,

आपसी प्रेम व विश्वास का वातावरण उत्पन्न किए बगैर आख्या रूप में या आलोचनात्मक रूप में दिए गए निर्देशों का शिक्षकों की दक्षता में विकास करने हेतु कोई विशेष योगदान नहीं होता।

निरोधात्मक पर्यवेक्षण

निरोधात्मक पर्यवेक्षण में पर्यवेक्षक के पास व्यापक अनुभव होना चाहिए। वह ऐसी परिस्थितियाँ विकसित करने पर बल देता है, जिसमें गलतियाँ होने की संभावनाएँ बहुत ही कम रह जाती हैं,

अर्थात खत्म ही हो जाती हैं। यह पर्यवेक्षण शिक्षकों में भी दूरदर्शिता व कल्पनाशीलता विकसित करने तथा पूर्व नियोजित ढंग से कार्य करने की क्षमता बढ़ाने पर प्रमुख रूप से बल देने का कार्य करता है।

सर्जनात्मक पर्यवेक्षण

सृजनात्मक पर्यवेक्षण के अंतर्गत शिक्षकों को स्वतंत्र रूप से चिंतन करने के लिए उत्साहित किया जाता है, प्रेरित किया जाता है।

पर्यवेक्षण का यह रूप अधिक मानवीय तथा वैज्ञानिक प्रकार का होता है। शिक्षकों को स्वयं आत्म मूल्यांकन के द्वारा अपने दोषों का पता लगाने उसका विश्लेषण करने और उन दोषों को दूर करने के लिए

उत्साहित किया जाता है। यह पर्यवेक्षण का आदर्श रूप माना जाता है, जो शिक्षकों के आत्मविश्वास में वृद्धि करता है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उपयोगी सिद्ध होता है।

प्रजातांत्रिक पर्यवेक्षण

पर्यवेक्षण का यह रूप प्रजातांत्रिक विशेषताओं से परिपूर्ण होता है। इसमें सामूहिक नियोजन स्वतंत्र विचारों व्यक्तिगत विभिन्नता को मान्यता प्रजातांत्रिक नेतृत्व तथा मानवीय संबंधों के विकास जैसे गुण प्रमुख रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

हस्तक्षेप सहित पर्यवेक्षण

हस्तक्षेप सहित पर्यवेक्षण में पर्यवेक्षण की प्रक्रिया आरंभ ही नहीं होती। इस सर्वेक्षण में पर्यवेक्षक की भूमिका निर्वाह करने वाला शिक्षक शिक्षण अधिगम दशाओं में

विकास और उनमें सुधार के लिए कुछ भी नहीं करता यदि कोई शिक्षक अपना विकास करना चाहता भी है, तो वह स्वतंत्र रहता है. संभावित धारा यह बनी रहती है, कि जो कुछ भी चल रहा है,

वह ठीक है अथवा शिक्षक स्वयं ही समय के साथ सब कुछ सीख कर पर्याप्त कुशलता हासिल कर लेंगे। ऐसा पर्यवेक्षक सरसरी निगाह से निरीक्षण करता हुआ कुछ औपचारिकताएँ पूरी कर लेता है।

प्रतिरोधात्मक या दमनात्मक पर्यवेक्षण

यह धारणा अहस्तक्षेप की धारणा से अलग होती है, इस परीक्षण को पर्यवेक्षण का परंपरागत रूप कहा जाता है। इस पर्यवेक्षण में शिक्षकों को हीन भावना से और पर्यवेक्षक को महान भावना से देखा जाता है।

इसमें निरंतर कर्मचारियों तथा अध्यापकों पर कड़ी निगाह रखी जाती है और आतंक भय का वातावरण उत्पन्न रहता है।

इसमें पर्यवेक्षक स्वयं को सर्वज्ञ ज्ञानी मानता है, तथा कार्य संपन्न कराने के सर्वोत्तम तरीके क्या है? इस बारे में और कुछ निश्चित धारणाएँ बना लेता है, तथा सभी को निश्चित धारणाओं पर चलने के लिए बाध्य करता है। यह रूप निम्न कारणों से दोषपूर्ण माना गया है।

यह इस बात पर विश्वास करता है, कि किसी कार्य के करने की कुछ सर्वोत्तम विधियाँ होती हैं, जिन्हें पर्यवेक्षक ही जानते हैं और पर्यवेक्षक ही शिक्षकों को प्रदान करता है। इस प्रकार यह रूप शिक्षा के प्रयोगात्मक पक्ष को अस्वीकार कर लेता है।

शिक्षकों के व्यक्तित्व निर्माण की दृष्टि से यह बहुत ही दोषपूर्ण है, इसमें पुरोगामिता, मौलिकता, स्वतंत्रता के स्थान पर दमन नियंत्रण

और पराधीनता की भावना प्रधान होती है, जिसमें भावना ग्रंथियों का निर्माण होता है और व्यक्तित्व का विभाजन होने लगता है।

इस प्रकार में शिक्षकों और पर्यवेक्षकों के संबंधों में मधुरता नहीं रहती और द्वेष भावना बनी रहती है, शिक्षकों में भय और अविश्वास उत्पन्न हो जाता है।

जनतांत्रिक पर्यवेक्षण

जनतांत्रिक पर्यवेक्षण के सिद्धांत की मूलधारणा इस बात पर टिकी होती है, कि शिक्षा की क्रिया का नियोजन उसका कार्यान्वयन, व्यवस्थापन तथा मूल्यांकन

विद्यालय के संपूर्ण कार्यकर्ताओं के द्वारा सामूहिक ढंग से होना चाहिए। इस सिद्धांत के अनुसार सहयोग जितना अधिक प्राप्त होता है, पर्यवेक्षण उतना ही उत्तम होता है और फल की प्राप्ति उससे बेहतर होती है।

यह पर्यवेक्षक विद्यालय की परिस्थितियों से उत्पन्न शिक्षकों की समस्याओं का समाधान उन्हीं के सहयोग से करने पर बल भी देता है।

इसमें आत्मज्ञान संरचनात्मक तथा स्वतंत्र चिंतन और प्रयोगात्मक क्रियाओं को प्रधानता मिलती है. यह पर्यवेक्षण शुद्ध जनतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित माना जाता है।

रचनात्मक पर्यवेक्षण

रचनात्मक पर्यवेक्षण की विचारधारा में मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों के विकास से प्रभावित मानी जाती है। इस धारणा के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति में रचनात्मक शक्ति अवश्य होती है।

अतः पर्यवेक्षक का उत्तर दायित्व छात्रों व शिक्षकों की शक्ति को पहचानना तथा उसके विकास के लिए आवश्यक वातावरण का निर्माण करना होना चाहिए।

रचनात्मक पर्यवेक्षण की प्रमुख विशेषताएँ

रचनात्मक पर्यवेक्षण शिक्षकों को अपने विचार के अनुसार प्रयोग करके मार्ग में बाधा नहीं डालता यह उनकी कठिनाइयों पर दृष्टि डालता है।

यह शिक्षकों को अपने विकास के लिए कार्य करने को प्रोत्साहित करने का काम करता है। इसमें आत्मविश्वास तथा आत्म मूल्यांकन की पीड़ा उत्पन्न होती है।

यह शिक्षकों को अपने चिंतन अनुसार पर्यवेक्षकों के साथ स्वतंत्र पूर्वक सहयोग करने की प्रेरणा देता है।

यहाँ पर आपने शैक्षिक पर्यवेक्षण के प्रकार (Types of supervision in education) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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  1. शिक्षा नियोजन की प्रिक्रिया
  2. शैक्षिक नियोजन के प्रकार



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