शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया Process of Educational Planning

शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया

शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया Process of Educational Planning 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया (Process of Educational Planning) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया के बारे में जानेंगे तो आइये शुरू करते है यह लेख शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया:-

शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया Process of Educational Planning 

शिक्षा नियोजन  की प्रक्रिया में सबसे उत्तम सिद्धांतों का उपयोग किया जाना बहुत ही आवश्यक होता है, क्योंकि शिक्षा ही एक वह आधारभूत आयाम है,

जिसके द्वारा समस्त प्राणियों का सर्वागीण विकास के साथ ही देश और राज्य का भी विकास होता है। इलियट एवं मोजर जेबी सीयर्स ने सामान्य पक्ष,

अनुसंधान, सतत, निश्चित, यथार्थ एवं व्यवहारिक सहभागिता तथा संशोधन जैसे पक्षों पर विशेष रूप से बल दिया है। भारत में योजना बनाने के लिए योजना आयोग का गठन 1950 में हुआ था

वर्तमान में इसके स्थान पर नीति आयोग कार्य कर रहा है। उक्त आयोग में 8 सदस्य सम्मिलित रहते हैं, जिनमें आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री तथा उपाध्यक्ष योजना का मंत्री हुआ करता है।

आयोग का प्रमुख कार्य प्रशासनिक नीतियों का निर्धारण करना, विकास हेतु नवीन कार्यक्रम तैयार करना, धन की व्यवस्था कराना एवं उसे प्रत्येक मद पर व्यय करने हेतु वितरित करना तथा

योजना क्रियान्वित होने पर उस योजना का मूल्यांकन करना और सुझाव देना आदि समाहित होता है। योजना बनाने के लिए निम्न प्रकार के चरणों का उपयोग किया जाता है।

नियोजन तैयार करना Preparation for planning

किसी भी योजना को तैयार करने के लिए यह सबसे प्रथम चरण होता है, जिसमें उपलब्ध सामग्री, सुविधाओं तथा आवश्यकता के आधार पर एक विशेष प्रारूप तैयार किया जाता है जो नियोजन प्रारूप कहलाता है।

नियोजन तैयार करते समय उसको लचीला बनाया जाता है, क्योंकि उसमें आवश्यकता अनुसार परिवर्तन भी किया जा सके नियोजन का प्रारूप तैयार करके विचार-विमर्श के उपरांत प्रतिवेदन तैयार होता है,

जिसे राष्ट्रीय विकास परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है इस प्रतिवेदन में आवश्यक संशोधन होते हैं इसके बाद इसे सामान्य निर्देश द्वारा प्रसारित किया जाता है।

विशेषज्ञों द्वारा विचार विमर्श Consulting the specialist

परिषद द्वारा नियोजन के प्रतिवेदन से संबंधित निर्देश देने के बाद विशेषज्ञों की बैठक होती है और उस नियोजन पर विचार विमर्श किए जाते हैं

इसके साथ ही शिक्षा विशेषज्ञों के पैनल आते हैं जो शिक्षा की नीतियों को ध्यान में रखकर योजना के प्रत्येक पहलू को उसकी शैक्षिक प्रगति के आधार पर ध्यान से विश्लेषण किया जाता है,

उस पर विचार विमर्श करते हैं, इसके साथ सहायता हेतु केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न शिक्षा अधिकारी, शिक्षाविद उस कार्यक्रम, योजनाओं पर विचार प्रस्तुत करते हैं जिसके आधार पर संपूर्ण देश राज्य विशेष की शिक्षा प्रगति की योजना तैयार होती है। 

स्मरण पत्र Memorandum

कार्यक्रमों और कार्यदलों के आधार पर योजना आयोग एक स्मरण पत्र तैयार करता है, जिसे राष्ट्रीय विकास परिषद के समक्ष पुनः रखा जाता है। परिषद इस पर अपने मूल सुझावों के साथ उसे पुनः आयोग के पास भेज देती है।

विधानसभा अथवा संसद की स्वीकृति Approval of Legislature

नियोजन के प्रारूप पर गहन विचार करने के बाद अंतिम स्वरूप देने की बात आती है, इसके उपरांत उसे राज्य की विधानसभा अथवा

केंद्र में संसद की आवश्यक स्वीकृति के लिए दे दिया जाता है, विधानसभा में तथा केंद्र में संसद की स्वीकृति मिल जाने पर योजना को संपूर्ण देश में क्रियान्वित करना होता है।

क्रियान्वयन Execution

संसद के द्वारा तथा विधानसभा के द्वारा स्वीकृति मिलने के पश्चात केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार इसे क्रियान्वित करती हैं,

जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश के साथ क्रियान्वयन के आदेश दिए जाते हैं जिसके आधार पर योजना अनुसार कार्य प्रारंभ हो जाता है।

मूल्यांकन Evaluation

जब योजना क्रियान्वित हो जाती है तो उसका मूल्यांकन करना भी आवश्यक होता है। क्रियान्वित योजना अनुसार उसके प्रत्येक पहलू पर उसकी

कड़ी नजर रखी जाती है और पर्याप्त अनुभव और परिणामों के आधार पर योजना का समय-समय पर मूल्यांकन होता है तथा इसकी रिपोर्ट उपयुक्त अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है।

दोस्तों आपने यहाँ शिक्षा नियोजन की प्रक्रिया (Process of Educational Planning) पढ़ी। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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  1. शैक्षिक नियोजन क्या है अर्थ उद्देश्य तथा आवश्यकता
  2. शैक्षिक नियोजन के प्रकार

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