कोहलर का सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत Kohler ka soojh or antardrishti ka sidhant
कोहलर कौन था who was kohler
कोहलर का पूरा नाम वोल्फगैंग कोहलर (Wolfgang köhler) था। जिनका जन्म 21 जनवरी 1887 में जर्मनी में हुआ था। गेस्टाल्ट स्कूल के विकास में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कोहलर अपने समय के सबसे बड़े मनोवैज्ञानिक (Psychologist) थे। इन्होने कई जर्मन विश्वविद्यालय में अध्ययन किया तथा कार्ल स्टंप के साथ डॉक्टरेट की थीसिस पूरी की।
कोहलर ने फ्रैंकफर्ट में इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया तथा कोहलर, वर्थाइमर के साथ मिलकर स्कूल ऑफ गेस्टाल्ट की स्थापना की। कोहलर ने सीखने की प्रिक्रिया पर कई पशुओं पर अध्ययन किया।
कोहलर का सिद्धांत Theory of Kohler
सीखना निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को लोग विभिन्न तरीकों से सीखते हैं। कुछ लोग तो कार्यों को करके सीखते हैं और कुछ लोग ऐसे होते हैं जो किसी दूसरे को उस कार्य को करते हुए
देखकर सीखते हैं। किंतु कुछ कार्य ऐसे भी होते हैं जिन्हें बिना बताए अपने आप ही सीखा जा सकता है, जिसे सीखने का सूझ द्वारा सीखना कहा जाता है। सूझ के इस सिद्धांत के प्रतिपादक जर्मनी के गेस्टाल्टवादी है।
जिसमें कोफ्क़ा कोहलर वरदाइमर है। इसलिए इस सिद्धांत को गेस्टाल्टवादी सिद्धांत कहा जाता है। जिसमें कोहलर ने बताया है कि व्यक्ति को अपनी समस्या का पूर्ण मानसिक शक्ति द्वारा परिस्थिति का बोध हो जाता है और सूझ के द्वारा उसका हल निकल आता है।
सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत का प्रयोग Soojh ya antardrishti ka sidhant ka prayog
कोहलर ने सूझ या अंतर्दृष्टि सिद्धांत का प्रयोग एक चिंपांजी पर किया जिसका नाम सुल्तान (Sultan) था। कोहलर के द्वारा सुल्तान नामक चिंपांजी पर कई प्रयोग किए गए।
उन्होंने सुल्तान को एक बड़े पिंजरे (Cage) में बंद कर दिया और उस पिंजरे में केले (Bananas) लटका दिए तथा एक छड़ी रख दी चिंपांजी ने उस छड़ी के द्वारा उन केलों को गिरा दिया।
इसके बाद उन्होंने पिंजरे में दो छड़ियाँ रख दी जो आपस में मिल जोड़ी जा सकती थी। इस बार उन्होंने केलों को थोड़ा ऊपर लटका दिया सुल्तान ने एक छड़ी के द्वारा केले गिराने की कोशिश की
किंतु वह छड़ी के द्वारा केले तक नहीं पहुंच पाया कुछ देर बाद वह दोनों छडियों के साथ खेलने लगा और दोनों छड़ियाँ आपस में मिल गई इस प्रकार उसने दोनों छड़ियों की मदद से केलों को गिरा लिया।
अपने अगले प्रयोग में कोहलर ने छडियों की जगह पर एक बॉक्स (Box) पिंजरे में रख दिया और केलों को पिंजरे में लटका दिया। सुल्तान ने बॉक्स पर चढ़कर केलों को नीचे गिरा लिया।
अपने अगले प्रयोग में कोहलर ने पिंजरे में दो बॉक्स रख दिए और केलों को थोड़ी और ऊंचाई पर रख दिया। चिंपांजी ने दोनों बोक्सो को एक के ऊपर एक रखकर केलों को नीचे गिरा लिया तथा अपने प्रयोगों में सफल होता गया।
कक्षा शिक्षण में महत्व Importance in classroom teaching
कोहलर का यह सूझ और अंतर्दृष्टि का सिद्धांत रचनात्मक कार्यों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
सूझ और अंतर्दृष्टि के सिद्धांत के द्वारा कल्पना, तर्क चिंतन की शक्ति का विकास होता है।
यह सिद्धांत कठिन विषय जैसे की गणित, विज्ञान आदि के शिक्षण में महत्वपूर्ण सिद्ध होता है।
यह सिद्धांत साहित्य के क्षेत्र में संगीत और कला के क्षेत्र में भी प्रयोग में लाया जाता है।
यह सिद्धांत बालकों को स्वयं खोज करके ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरणा देता है।
विद्यालय में जो छात्रों की समस्या होती हैं उसका समाधान पर आधारित सीखने में यह विधि अधिक महत्वपूर्ण होती है।
दोस्तों इस लेख में आपने कोहलर का सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत (Kohlar ka soojh or antardrishti ka sidhant) पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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