सरीसृप वर्ग के लक्षण Characteristics of Reptile Class
सरीसृप किसे कहते है what is Reptile
सरीसृप सामान्य लक्षणो वाले जीव जंतुओं का एक वर्ग है, जिसमें लगभग एक समान लक्षणों वाले जीवो को रखा गया है।
सरीसृप को अंग्रेजी में Reptelia कहा जाता है। रेपटीलिया शब्द की उत्पति Reptum से हुई है, जिसका अर्थ होता है, creep रेंगना, अर्थात सरीसृप रेंगने वाले जंतुओं का समूह है।
सरीसृप प्राथमिक तौर पर स्थलीय जंतु होते है, कियोकि यह अपने अंडे स्थल पर देते है, जैसे कि जल के किनारों पर, कहीं ज़मीन पर, अँधेरे जगह पर, आदि।
जबकि सरीसृप द्वीतीयक रूप से जलीय होते है, कियोकि कुछ जंतु जो सरीसृप है, जल में रहने के अनुकूलित होते है।
इन जंतुओ में श्वशन फेफड़ों के द्वारा होता है। सरीसृप जंतु के लक्षण उभयचर, स्तनी तथा मछली वर्ग में भी देखने को मिलते है।
सरीसृप वर्ग के जंतु शीत रुधिर वाले होते है, जबकि सरीसृपों के अध्ययन को हरपेटोलॉजी (Herpatology) कहा जाता है।
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| सरीसृप |
सरीसृप वर्ग के लक्षण Reptile varg ke lakshan
आवास एवं स्वभाव - सरीसृप अधिकतर स्थलीय जंतु होते है, तथा रेंगते है, ये भूमि पर बिल बनाकर तथा वृक्षों और झाडियों में रहते है, जबकि कुछ जंतु जल में भी रहते है।
शारीरिक तापक्रम - यह जंतु शीत रुधिर वाले होते है। इन जंतुओ में शीत ओर ग्रीष्म निष्क्रियता (Inaction) होती है।
शारीरिक विभाजन - इन प्राणियों का शरीर सिर, ग्रीवा, धड, ओर एक लम्बी पूँछ में बंटा रहता है। यह जंतु चार पैरों वाले जंतु होते हैं
जिनमें अग्र पार दो और दो पश्च पाद होते हैं, इनके पावों में पांच पांच नाखूनयुक्त उंगलियाँ होती है। सरीसृप में केवल सर्प पाद रहित होते है.
वाह कंकाल - इन प्राणियों के शरीर का वाह कंकाल (External skeleton) उपचर्मीय शल्क, अस्थिल प्लेट, प्रश्नल्क से निर्मित होता है।
अन्तः कंकाल - सरीसृप का अन्तः कंकाल (Endoskeleton) अस्थिल होता है, सरीसृप की खोपड़ी के मध्य में एक अस्थिकंद उपस्थित होता है,
इस प्रकार की खोपड़ी (कपाल) को मोनोकॉन्डाइलिक कहा जाता है, इन जंतुओ की मेंडिबिल कई भागों के द्वारा निर्मित होती है, तथा कपाल से प्रचलनशील क्वाड्रेट अस्थि के द्वारा संयुक्त रहती है।
इन जंतुओ के दाँत नुकीले होते हैं जो बहुवारदंति ओर समदन्ति होते हैं। किंतु मगरमच्छ में विषमदंती और गर्तदंति होते हैं। जंतुओं की कशेरुकाएं अग्रगर्ती, प्रकार की होती हैं जबकी एक सुविकसित स्टारनम पशलियों युक्त होता है।
त्वचा - सरीसृप वर्ग के सभी जंतुओं की त्वचा (Skin) शुष्क किरेटीन युक्त होती है, क्योंकि इनके शरीर की त्वचा पर किसी प्रकार की ग्रंथियां नहीं पाई जाती।
पाचन तंत्र - सरीसृप वर्ग के जंतुओं में पूर्ण आहार नाल होती है, आहार नाल में मुख अग्र सिरे पर तथा पश्च सिरे पर क्लोएका स्थित होती है।
श्वसन तंत्र - जंतुओं में श्वसन की क्रियाविधि फेफड़ों के द्वारा संपादित होती है. जंतुओं में फेफड़े पतली भित्ति के खोखले और रक्त वाहिकामय होते हैं।
परिसंचरण तंत्र - सरीसृप वर्ग के जंतुओं का हृदय (Heart) तीन कक्षीय या तीन कोष्टीय होता है, सरीसृप वर्ग के अधिकांश जंतुओं में नीलय अपूर्ण रूप से विभाजित होता है,
इसलिए इन जंतुओं में एक निलय और दो आलिंद होते हैं, किंतु मगरमच्छों में निलय पूर्ण रूप से विभाजित हो जाता है इसलिए मगरमच्छ चार कोष्टिय जंतु हो जाते हैं। प्राणियों के रक्त में लाल रक्त कणिकाएँ (RBC) बड़ी और केंद्रक युक्त होती है।
उत्सर्जन तंत्र - सरीसृप वर्ग के प्रमुख उत्सर्जन अंग एक जोड़ी मैटानेफ्रिक प्रकार के वृक्क होते हैं, यह जंतु उत्सर्जी पदार्थ के रूप में यूरिक एसिड उत्सर्जित करते हैं , इसलिए इन जंतुओं को यूरिकोटेलिक (Uricotellic) कहा जाता है।
तंत्रिका तंत्र - जंतुओं में मस्तिष्क विकसित होता है जबकि कपाल तंत्रिकाओं की संख्या 12 जोड़ी होती है मुख गुहा की छत में जोकोबसन के अंग होते हैं।
प्रजनन तंत्र - सरीसृप वर्ग के जंतु एक लिंगी होते है। नर जंतु में मैथुन अंग एक जोड़ी मैथुनकोष में या फिर हेमिपेनिस में होते है।
परिवर्धन - इन जंतुओ में आंतरिक निषेचन होता है। किन्तु जलीय ओर स्थलीय जंतु अंडे ज़मीन पर देते है। इन जंतुओ में प्रत्यक्ष परिवर्धन पाया जाता है।
परिवर्धन के दौरान अतिरिक्त भ्रूणीय झिल्लीयाँ जैसे - एम्नियोन, कोरियोन, एलेनटॉइस और पीतक कोष विकसित होते है।
सरीसृप वर्ग का वर्गीकरण classification of Reptile class
सरीसृप वर्ग को खोपड़ी / कपाल के टेम्पोरल क्षेत्र में पाए जाने वाले छिद्र की संख्या और स्थिति के आधार पर निम्न 6 उपवर्गों में बांटा गया है:-
1. उपवर्ग - एनेप्सिडा
सामान्य लक्षण
- इस उपवर्ग के प्राणियों की कपाल के टेम्पोरल में छिद्र नहीं पाए जाते
- इनमें क्वाडरेट अस्थि कर्ण अस्थि से संयुक्त रहती है।
- इन प्राणियों का शरीर पृष्ठ में केरापेस और अधर से प्लास्ट्रॉन से ढंका रहता है।
इस उपवर्ग के दो गण (आर्डर) है
1. गण - कोटिलोसारिया
2. गण - कीलोनिया
2. उपवर्ग - इकथीयोटैरिजिया
सामान्य लक्षण
- इस उपवर्ग के प्राणियों की कपाल में टेम्पोरल क्षेत्र में पाशर्व में एक-एक रिक्तिका पायी जाती है।
- इस टेम्पोरल रिक्तिका ऊपर की तरफ से पेराइटल और नीचे की तरफ से पोस्ट फ्रंटल तथा सुप्रा टेम्पोरल नामक अस्थियों से घिरा रहता है।
इस उपवर्ग के दो गण (आर्डर) है
1. गण - मीसोसोरिया
2. गण - इकथीयोसोरस
3. उपवर्ग - सिनेप्टोसोरिया
सामान्य लक्षण
- इन प्राणियों में कपाल में केवल एक ही टेम्पोरल छिद्र उपस्थित होता है।
इस उपवर्ग के दो गण (आर्डर) है
1. गण - प्रोटोसोरिया
2. गण - सोरोप्टोरिजिया
4. उपवर्ग - लेपिडोसोरिया
सामान्य लक्षण
- इस उपवर्ग के प्राणियों की कपाल के टेम्पोरल में दो रिक्तिकायें उपस्थित होती है।
- इन प्राणियों में अग्र नेत्र छिद्र नहीं होते।
- इस उपवर्ग में सभी विलुप्त प्राणी शामिल है।
इस उपवर्ग के तीन गण (आर्डर) है
1. गण - ईओसूचिया
2. गण - रिंकोसिफेलिया
3. गण - स्कवामाटा
5. उपवर्ग - ओर्कोसोरिया
सामान्य लक्षण
- इस उपवर्ग के प्राणियों की कपाल में ऊपरी टेम्पोरल रिक्तिका बंद रहती है, जबकि दोनों टेम्पोरल आर्च पाए जाते है।
- इन प्राणियों में अग्र ओर्बीटल छिद्र पाए जाते है।
- इन प्राणियों में दाँत गर्तदंति होते है।
- सभी प्राणियों के पिछले पैर लम्बे और मजबूत होते है।
इस उपवर्ग के पाँच गण (आर्डर) है.
1. गण - थीकोडोंशिया
2. गण - क्रोकोडीलिड़ा/लोरीकेटा
3. गण - टेरोसोरिया
4. गण - सॉरिशिचया
5. गण - ओर्निथीशिचया
6. उपवर्ग - सिनेप्सिड़ा
सामान्य लक्षण
- इस उपवर्ग के प्राणियों के कपाल के टेम्पोरल क्षेत्र में दोनों तरफ एक - एक रिक्तिका पायी जाती है।
- यह रिक्तिका ऊपर की तरफ से पोस्ट ओर्बीटल और सकवामोजल अस्थि से जबकि नीचे की तरफ से जुगल और सकवामोजल अस्थि से घिरी रहती है।
इस उपवर्ग के तीन गण (आर्डर) है।
1. गण - पेलिकोसोरिया
2. गण - थेरेपसिडा
3. गण - एक्टिड़ोसोरिया
दोस्तों इस लेख में आपने सरीसृप वर्ग के लक्षण (Characteristics of Reptile)के साथ सरीसृप वर्ग का वर्गीकरण पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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